विस्तृत उत्तर
केदारनाथ भगवान शिव का पाँचवाँ ज्योतिर्लिंग और बारह ज्योतिर्लिंगों में अत्यंत पावन माना जाता है।
शिव पुराण और केदारनाथ — शिव पुराण के कोटिरुद्र संहिता में 12 ज्योतिर्लिंगों का वर्णन है जिनमें केदारनाथ सम्मिलित है। यह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में हिमालय की केदार चोटी पर स्थित है।
पांडव और केदारनाथ — पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत के बाद पांडव गोत्र-हत्या के पाप से मुक्ति के लिए शिव के दर्शन को आए। शिव पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे इसलिए भैंसे के रूप में अंतर्धान होने लगे। भीम ने भैंसे को पकड़ा तो शिव का पृष्ठ-भाग (पीठ का हिस्सा) यहाँ रह गया और वे अंतर्धान हो गए। वही शिव का 'केदार' (पीठ) रूप ज्योतिर्लिंग है।
विशेष महत्व —
चार धाम यात्रा में केदारनाथ का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह जन्मों के पापों को नष्ट करने वाला तीर्थ माना जाता है। हिमालय में स्थित होने से यह 'स्वर्ग के द्वार' के समीप माना जाता है।
ज्योतिर्लिंग का स्वरूप — यहाँ स्थापित शिवलिंग त्रिकोणीय आकार का है जो भैंसे की पीठ के आकार का प्रतीक है।




