विस्तृत उत्तर
उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित छोटी चार धाम यात्रा — यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ — का एक निश्चित पारंपरिक क्रम है जिसका पालन करना शास्त्रोक्त और शुभ माना जाता है। यह क्रम पश्चिम से पूर्व की दिशा में है। सबसे पहले यमुनोत्री के दर्शन होते हैं, जो माँ यमुना का उद्गम स्थल है और गढ़वाल हिमालय के पश्चिमी छोर पर स्थित है। यहाँ से दिव्य यात्रा का शुभारंभ होता है। दूसरा पड़ाव गंगोत्री है, जो माँ गंगा का उद्गम स्थल है और उत्तरकाशी जिले में है। तीसरा पड़ाव केदारनाथ है — भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक, जो रुद्रप्रयाग जिले में 3,583 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। अंतिम और सर्वोच्च पड़ाव बद्रीनाथ है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है और चमोली जिले में अलकनंदा नदी के तट पर 3,133 मीटर की ऊँचाई पर है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस क्रम को तोड़ने से यात्रा का पूर्ण फल नहीं मिलता। भौगोलिक रूप से भी यह क्रम तार्किक है — इससे शरीर क्रमशः अधिक ऊँचाई के अनुकूल होता जाता है। यात्रा प्रतिवर्ष अप्रैल-मई में अक्षय तृतीया के आसपास आरंभ होती है और अक्टूबर-नवंबर में शीतकाल के लिए कपाट बंद हो जाते हैं। इसे मोक्ष यात्रा भी कहा जाता है — मान्यता है कि इस यात्रा के पूर्ण होने पर जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं।





