विस्तृत उत्तर
घंटाकर्ण का बद्रीनाथ धाम से अत्यंत गहरा संबंध है।
जब शिव ने घंटाकर्ण से कहा कि मोक्ष केवल विष्णु दे सकते हैं, तो वह बदरिकाश्रम (बद्रीनाथ) गया। वहाँ श्रीकृष्ण ने उसकी उग्र पर निश्छल भक्ति देखकर उसे गले लगाया — स्पर्श मात्र से पिशाच योनि छूटी और दिव्य शिवगण-स्वरूप मिला।
इसीलिए आज भी बद्रीनाथ धाम के माणा गाँव में घंटाकर्ण रक्षक देवता के रूप में विशेष पूजा प्राप्त करते हैं। वे बद्रीनाथ क्षेत्र के क्षेत्रपाल (Guardian Deity) माने जाते हैं।
गढ़वाल क्षेत्र के अनेक गाँवों में घंटाकर्ण देवता के मंदिर मिलते हैं और उनकी परंपरागत केदार यात्रा भी निकाली जाती है।
यह कथा हरि-हर एकता का परम प्रमाण है — शिव के भक्त को विष्णु ने मोक्ष दिया, और विष्णु के धाम का रक्षक शिव का गण बना।





