विस्तृत उत्तर
भगवद गीता का संदेश
भगवद्गीता महाभारत के भीष्मपर्व का अंश है। कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में जब अर्जुन मोह और शोक में डूब गए, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें जो दिव्य उपदेश दिया — वही गीता है। इसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं।
मुख्य संदेश — बिंदुवार
1आत्मा की अमरता
आत्मा अजर-अमर है। वह न कभी जन्मती है, न मरती है। शरीर नष्ट होता है, आत्मा नहीं — यही ज्ञान का आधार है।
2निष्काम कर्म
*'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।'* (2.47) — कर्म करो, फल की चिंता मत करो। यह गीता का सर्वमुख्य संदेश है।
3स्वधर्म का पालन
प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म (कर्तव्य) का पालन करना चाहिए। *'श्रेयान् स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।'* — परधर्म से स्वधर्म श्रेष्ठ है।
4मोक्ष के तीन मार्ग
कर्म योग, ज्ञान योग और भक्ति योग — तीनों ही मोक्ष के मार्ग हैं।
5समत्व बुद्धि
सुख-दुख, लाभ-हानि, जय-पराजय में समभाव रखना — यही योगी का लक्षण है।
6भगवान की सर्वव्यापकता
ईश्वर समस्त प्राणियों में है। समदर्शिता और सेवाभाव से ही ईश्वर की प्राप्ति होती है।
7अंतिम शरण
*'सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।'* (18.66) — सब धर्म छोड़कर एकमात्र मेरी शरण में आ। यह गीता की चरम उद्घोषणा है।





