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भगवद गीता⏱ 1 मिनट पठन

गीता का सबसे प्रसिद्ध श्लोक कौन सा है?

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। (गीता 2. 47) — कर्म करो, फल की चिंता मत करो। यही कर्म योग का सार है।

संक्षिप्त उत्तर

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। (गीता 2.47) — कर्म करो, फल की चिंता मत करो। यही कर्म योग का सार है। सर्वाधिक प्रसिद्ध, उद्धृत और प्रासंगिक श्लोक। अन्य प्रमुख: 4.7 (अवतार), 18.66 (शरणागति)।

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विस्तृत उत्तर

गीता का सबसे प्रसिद्ध श्लोक

श्लोक (2.47)

*कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।*

*मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि।।*

अर्थ

तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, कर्म के फलों में कभी नहीं। न तो तुम कर्म के फलों के कारण बनो और न ही कर्म न करने में तुम्हारी आसक्ति हो।

यह श्लोक क्यों सर्वप्रसिद्ध है?

  1. 1यह कर्म योग का सार है और मानव जीवन की सबसे बड़ी दुविधा — 'फल की चिंता' — का समाधान देता है।
  2. 2यह किसी भी कार्यक्षेत्र में — छात्र, व्यापारी, सैनिक, गृहस्थ — सभी के लिए प्रेरणा है।
  3. 3वैज्ञानिक, दार्शनिक, राजनेता — सभी ने इसे उद्धृत किया है।

अन्य महत्वपूर्ण श्लोक

  • ▸4.7-4.8 — 'यदा यदा हि धर्मस्य' (अवतार वचन)
  • ▸9.22 — 'अनन्याश्चिन्तयन्तो माम्' (ईश्वर का वचन भक्त-रक्षा हेतु)
  • ▸18.66 — 'सर्वधर्मान् परित्यज्य' (चरम शरणागति)

टिप्पणी: 2.47 सर्वाधिक उद्धृत, स्मरित और प्रचलित है, अतः यही सर्वप्रसिद्ध श्लोक माना जाता है।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

गीता का सबसे प्रसिद्ध श्लोक कौन सा है को संदर्भ सहित समझें

गीता का सबसे प्रसिद्ध श्लोक कौन सा है का सबसे सीधा सार यह है: कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। (गीता 2.47) — कर्म करो, फल की चिंता मत करो। यही कर्म योग का सार है। सर्वाधिक प्रसिद्ध, उद्धृत और प्रासंगिक श्लोक। अन्य प्रमुख...

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