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भगवद गीता📜 भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 471 मिनट पठन

गीता का सबसे प्रसिद्ध श्लोक कौन सा है?

संक्षिप्त उत्तर

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। (गीता 2.47) — कर्म करो, फल की चिंता मत करो। यही कर्म योग का सार है। सर्वाधिक प्रसिद्ध, उद्धृत और प्रासंगिक श्लोक। अन्य प्रमुख: 4.7 (अवतार), 18.66 (शरणागति)।

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विस्तृत उत्तर

गीता का सबसे प्रसिद्ध श्लोक

श्लोक (2.47)

*कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।*

*मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि।।*

अर्थ

तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, कर्म के फलों में कभी नहीं। न तो तुम कर्म के फलों के कारण बनो और न ही कर्म न करने में तुम्हारी आसक्ति हो।

यह श्लोक क्यों सर्वप्रसिद्ध है?

  1. 1यह कर्म योग का सार है और मानव जीवन की सबसे बड़ी दुविधा — 'फल की चिंता' — का समाधान देता है।
  2. 2यह किसी भी कार्यक्षेत्र में — छात्र, व्यापारी, सैनिक, गृहस्थ — सभी के लिए प्रेरणा है।
  3. 3वैज्ञानिक, दार्शनिक, राजनेता — सभी ने इसे उद्धृत किया है।

अन्य महत्वपूर्ण श्लोक

  • 4.7-4.8 — 'यदा यदा हि धर्मस्य' (अवतार वचन)
  • 9.22 — 'अनन्याश्चिन्तयन्तो माम्' (ईश्वर का वचन भक्त-रक्षा हेतु)
  • 18.66 — 'सर्वधर्मान् परित्यज्य' (चरम शरणागति)

टिप्पणी: 2.47 सर्वाधिक उद्धृत, स्मरित और प्रचलित है, अतः यही सर्वप्रसिद्ध श्लोक माना जाता है।

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शास्त्रीय स्रोत
भगवद्गीता अध्याय 2, श्लोक 47
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