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कर्मण्येवाधिकारस्ते प्रश्नोत्तरी — 2 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित कर्मण्येवाधिकारस्ते विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 2 प्रश्न

भगवद गीता

गीता का सबसे प्रसिद्ध श्लोक कौन सा है?

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। (गीता 2.47) — कर्म करो, फल की चिंता मत करो। यही कर्म योग का सार है। सर्वाधिक प्रसिद्ध, उद्धृत और प्रासंगिक श्लोक। अन्य प्रमुख: 4.7 (अवतार), 18.66 (शरणागति)।

गीताप्रसिद्ध श्लोककर्मण्येवाधिकारस्ते
हिंदू दर्शन

कर्मण्येवाधिकारस्ते श्लोक का सही अर्थ क्या है

गीता 2.47 — (1) कर्म करना तुम्हारे हाथ में है (2) फल तुम्हारे नियंत्रण में नहीं (3) फल की लालसा कर्म का कारण न बने (4) 'फल नहीं तो कर्म क्यों' — यह सोच भी गलत। सार: पूर्ण समर्पण से कर्म करो, परिणाम ईश्वर पर छोड़ो।

गीताकर्मण्येवाधिकारस्तेकर्म

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।