तीर्थ एवं मंदिरघंटाकर्ण और बद्रीनाथ धाम का संबंध — माणा गाँव के रक्षक देवताश्रीकृष्ण ने बदरिकाश्रम में घंटाकर्ण को मोक्ष दिया। आज भी माणा गाँव (बद्रीनाथ) में वे रक्षक देवता — क्षेत्रपाल — के रूप में पूजित हैं। गढ़वाल के अनेक गाँवों में उनके मंदिर हैं।#घंटाकर्ण#बद्रीनाथ#माणा गाँव
तंत्र एवं साधनाकेरल तंत्र में घंटाकर्ण का क्या स्वरूप है?केरल दारुकजित विद्या में घंटाकर्ण शिव के कर्ण-मल से उत्पन्न — भद्रकाली के रक्षक 'पुलि-भैरव'। प्रेत-बाधा और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा उनकी भूमिका। तीनों परंपराओं में वे उग्र रक्षक देवता हैं।#घंटाकर्ण#केरल तंत्र#भद्रकाली
पौराणिक कथाएँघंटाकर्ण को मोक्ष कैसे मिला — श्रीकृष्ण और शिव की कथाशिव ने कहा मोक्ष केवल विष्णु दे सकते हैं। बदरिकाश्रम में श्रीकृष्ण ने घंटाकर्ण को गले लगाया — स्पर्श मात्र से पिशाच योनि छूटी, अठारह भुजाओं वाला शिवगण बना। आज भी बद्रीनाथ (माणा) में रक्षक देवता के रूप में पूजित।#घंटाकर्ण#मोक्ष#श्रीकृष्ण
पौराणिक कथाएँघंटाकर्ण कौन थे और उन्होंने कानों में घंटे क्यों बाँधे थे?घंटाकर्ण शिव का परम भक्त पिशाच था जो विष्णु से घृणा करता था। विष्णु का नाम न सुनने के लिए कानों में घंटे लटकाए — नाम सुनते ही सिर हिलाता, घंटों की ध्वनि नाम को दबा देती। इसी से नाम 'घंटाकर्ण' पड़ा।#घंटाकर्ण#शिवगण#पिशाच