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घंटाकर्ण से जुड़े सभी प्रश्न(4)

घंटाकर्ण पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

तीर्थ एवं मंदिर

घंटाकर्ण और बद्रीनाथ धाम का संबंध — माणा गाँव के रक्षक देवता

श्रीकृष्ण ने बदरिकाश्रम में घंटाकर्ण को मोक्ष दिया। आज भी माणा गाँव (बद्रीनाथ) में वे रक्षक देवता — क्षेत्रपाल — के रूप में पूजित हैं। गढ़वाल के अनेक गाँवों में उनके मंदिर हैं।

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तंत्र एवं साधना

केरल तंत्र में घंटाकर्ण का क्या स्वरूप है?

केरल दारुकजित विद्या में घंटाकर्ण शिव के कर्ण-मल से उत्पन्न — भद्रकाली के रक्षक 'पुलि-भैरव'। प्रेत-बाधा और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा उनकी भूमिका। तीनों परंपराओं में वे उग्र रक्षक देवता हैं।

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पौराणिक कथाएँ

घंटाकर्ण को मोक्ष कैसे मिला — श्रीकृष्ण और शिव की कथा

शिव ने कहा मोक्ष केवल विष्णु दे सकते हैं। बदरिकाश्रम में श्रीकृष्ण ने घंटाकर्ण को गले लगाया — स्पर्श मात्र से पिशाच योनि छूटी, अठारह भुजाओं वाला शिवगण बना। आज भी बद्रीनाथ (माणा) में रक्षक देवता के रूप में पूजित।

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पौराणिक कथाएँ

घंटाकर्ण कौन थे और उन्होंने कानों में घंटे क्यों बाँधे थे?

घंटाकर्ण शिव का परम भक्त पिशाच था जो विष्णु से घृणा करता था। विष्णु का नाम न सुनने के लिए कानों में घंटे लटकाए — नाम सुनते ही सिर हिलाता, घंटों की ध्वनि नाम को दबा देती। इसी से नाम 'घंटाकर्ण' पड़ा।

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