विस्तृत उत्तर
तमिलनाडु के मदुरई में स्थित मीनाक्षी अम्मन मंदिर 2,500 वर्षों से अधिक पुरानी गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है। इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा अत्यंत रोचक है। पांड्य राजा मलयाध्वज पांड्या ने पुत्र-प्राप्ति की कामना से यज्ञ किया। यज्ञ से एक कन्या प्रकट हुई जिसके तीन स्तन थे। ईश्वरीय आकाशवाणी हुई कि जब यह कन्या अपने योग्य पति से मिलेगी, तीसरा स्तन अपने आप लुप्त हो जाएगा। राजा ने उसे अपनी उत्तराधिकारी बनाया। वह कन्या मीनाक्षी (मछली जैसी आँखों वाली) कहलाई और देवी पार्वती का अवतार मानी गई। वह अत्यंत साहसी थीं और उन्होंने अनेक राजाओं और देवताओं को युद्ध में पराजित किया। एक दिन वे कैलाश पहुँचीं और भगवान शिव के सामने खड़ी हुईं — उसी क्षण उनका तीसरा स्तन अदृश्य हो गया और उन्हें अनुभव हुआ कि शिव ही उनके पति हैं। मदुरई लौटकर भगवान सुंदरेश्वर (शिव) और देवी मीनाक्षी का दिव्य विवाह संपन्न हुआ, जिसमें सभी देवता सम्मिलित हुए। भगवान विष्णु स्वयं कन्यादान के लिए आए थे, किंतु देरी होने पर विवाह स्थानीय देवता कूडल अझगर ने सम्पन्न कराया। इस विवाह की स्मृति में प्रतिवर्ष अप्रैल माह में चित्तिरई तिरुविझा उत्सव भव्य स्तर पर मनाया जाता है। 14 एकड़ में फैला यह मंदिर 14 भव्य गोपुरमों के लिए प्रसिद्ध है, जो द्रविड़ स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।





