विस्तृत उत्तर
पंच केदार उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित भगवान शिव के पाँच प्राचीन मंदिरों का समूह है। इनसे जुड़ी पौराणिक कथा महाभारत से संबंधित है — महाभारत युद्ध के बाद पांडव भ्रातृहत्या के पाप से मुक्ति के लिए भगवान शिव को खोजते हुए हिमालय पहुँचे। शिवजी उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए बैल का रूप धारण कर लिया। भीम ने उन्हें पहचान लिया। बैल रूपी शिव भूमि में समाने लगे तो भीम ने उनकी पीठ का कूबड़ पकड़ लिया। इसके बाद भगवान शिव के अंग पाँच अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए, जो आज पंच केदार के नाम से जाने जाते हैं। पहला केदार — केदारनाथ (3,583 मीटर, रुद्रप्रयाग जिला), जहाँ शिव का कूबड़ प्रकट हुआ था। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में भी शामिल है। दूसरा केदार — मदमहेश्वर (लगभग 3,497 मीटर, रुद्रप्रयाग जिला), जहाँ नाभि की पूजा होती है। तीसरा केदार — तुंगनाथ (3,680 मीटर, रुद्रप्रयाग जिला), जो विश्व का सबसे ऊँचा शिव मंदिर है और जहाँ भुजाओं की पूजा होती है। चौथा केदार — रुद्रनाथ (2,286 मीटर, चमोली जिला), जहाँ मुख की पूजा होती है। पाँचवाँ केदार — कल्पेश्वर (2,200 मीटर, चमोली जिला), जहाँ जटाओं की पूजा होती है और जो वर्षभर खुला रहता है। स्कंद पुराण के केदार खंड में इन पाँचों पीठों का विस्तार से वर्णन है। पाँचों मंदिरों की यात्रा लगभग 170 किलोमीटर का कठिन ट्रेक है।





