विस्तृत उत्तर
महाभारत का परिचय और सारांश वेदव्यास रचित महाभारत के आदि पर्व में मिलता है:
महाभारत का परिचय
- ▸रचनाकार: महर्षि वेदव्यास
- ▸लेखक: गणेश जी (वेदव्यास ने बोला, गणेश ने लिखा)
- ▸श्लोक: 1,00,000 (एक लाख) — 'शतसहस्री संहिता'
- ▸पर्व: 18
- ▸उपमहाकाव्य: 24,000 श्लोक का 'जय' सबसे पहले था
- ▸भाषा: संस्कृत
'महाभारत' क्यों
यन्नेहास्ति न तत् क्वचित्' — जो यहाँ नहीं है, वह कहीं नहीं है। महाभारत विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य है।
मुख्य पात्र
पांडव: युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव (पांडु के पुत्र)
कौरव: दुर्योधन, दुःशासन (+ 98 भाई — कुल 100 कौरव)
गुरु: द्रोणाचार्य, कृपाचार्य
दादा: भीष्म पितामह
कृष्ण: पांडवों के परामर्शदाता और मार्गदर्शक
कहानी का सारांश
1हस्तिनापुर का राज्य
पांडु की मृत्यु के बाद उनके पुत्र (पांडव) और धृतराष्ट्र के पुत्र (कौरव) हस्तिनापुर के लिए एक साथ पले। दुर्योधन पांडवों से ईर्ष्या करता था।
2लाक्षागृह षड्यंत्र
दुर्योधन ने पांडवों को लाख के महल (लाक्षागृह) में जलाने का षड्यंत्र किया — पांडव बच गए।
3द्रौपदी स्वयंवर
अर्जुन ने मत्स्ययंत्र भेदकर द्रौपदी को जीता। द्रौपदी पाँचों पांडवों की पत्नी बनी।
4इंद्रप्रस्थ और खांडवप्रस्थ
पांडवों को खांडव वन मिला। कृष्ण-अर्जुन ने इंद्रप्रस्थ नगर बसाया।
5द्यूत क्रीड़ा और वनवास
शकुनि की चाल से युधिष्ठिर ने द्यूत में सब कुछ हारा — राज्य, द्रौपदी। द्रौपदी चीरहरण। पांडवों को 13 वर्ष का वनवास + 1 वर्ष का अज्ञातवास।
6अज्ञातवास
पांडवों ने विराट नगर में भेष बदलकर एक वर्ष बिताया।
7कुरुक्षेत्र युद्ध (18 दिन)
संधि के सभी प्रयास विफल। श्री कृष्ण ने दोनों पक्षों को अपनी नारायणी सेना या स्वयं (निहत्थे) में से एक चुनने को कहा। दुर्योधन ने सेना चुनी, अर्जुन ने कृष्ण को।
8भगवद्गीता
युद्ध से पूर्व अर्जुन ने मोह में शस्त्र रख दिए। कृष्ण ने गीता का ज्ञान दिया।
9युद्ध के प्रमुख घटनाक्रम
- ▸1-9 दिन: भीष्म पितामह सेनापति
- ▸10वाँ दिन: अर्जुन के बाणों से भीष्म शरशय्या पर
- ▸11-15 दिन: द्रोणाचार्य सेनापति; अभिमन्यु वध
- ▸16-17 दिन: कर्ण सेनापति; कर्ण वध
- ▸18वाँ दिन: दुर्योधन वध; युद्ध समाप्त
10युद्धोत्तर
युधिष्ठिर राज्याभिषेक। 36 वर्ष बाद कृष्ण देहावसान। पांडवों का महाप्रस्थान (हिमालय की ओर)।
18 पर्वों का नाम
आदि, सभा, वन, विराट, उद्योग, भीष्म, द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक, स्त्री, शांति, अनुशासन, अश्वमेध, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थान, स्वर्गारोहण।





