विस्तृत उत्तर
केदारनाथ मंदिर से लगभग डेढ़ से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित भुकुंट भैरव मंदिर केदारनाथ यात्रा का अभिन्न और अनिवार्य अंग है। भगवान भैरवनाथ भगवान शिव का ही उग्र और रक्षक स्वरूप हैं, और उन्हें केदारपुरी का क्षेत्रपाल तथा पहला रावल माना जाता है।
परंपरा के अनुसार, केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने से पहले भैरवनाथ की पूजा की जाती है — इसके बाद ही बाबा केदार की आरती आरंभ होती है। जब शीतकालीन गद्दीस्थल उखीमठ से बाबा केदार की डोली रवाना होती है, तो पहले दिन ओंकारेश्वर मंदिर में भैरवनाथ की पूजा की जाती है, उसके बाद यात्रा आगे बढ़ती है।
भैरवनाथ का महत्व और भी इसलिए है क्योंकि जब शीतकाल में केदारनाथ के कपाट छह महीने के लिए बंद होते हैं और मंदिर परिसर में कोई नहीं रहता, तब भैरवनाथ ही केदार मंदिर सहित संपूर्ण केदारपुरी की रखवाली करते हैं। 2013 की भयंकर बाढ़ में जब मंदिर के चारों ओर सब कुछ नष्ट हो गया, तब भी मंदिर सुरक्षित रहा — इसे भैरवनाथ की रक्षा का प्रमाण मानते हैं।
शास्त्रीय मान्यता है कि काल भैरव के दर्शन किए बगैर केदारनाथ के दर्शन का फल अधूरा माना जाता है। पुराणों में भी बताया गया है कि 'बिना भैरों के दर्शन के यात्रा अधूरी रहती है।' इसलिए श्रद्धालु केदारनाथ दर्शन के बाद भैरवनाथ के दर्शन अवश्य करते हैं।





