विस्तृत उत्तर
तंत्रशास्त्र में भगवान भैरव का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। उन्हें स्वयं तंत्र-मंत्र का देवता माना जाता है।
तांत्रिक ग्रंथों में, विशेष रूप से रुद्रयामल तंत्र साधना में, बटुक भैरव को सर्वाधिक महत्त्व दिया गया है।
भैरव न केवल क्षेत्रपाल हैं, बल्कि उनकी कृपा के बिना कोई भी तांत्रिक सिद्धि पूर्ण नहीं होती।





