विस्तृत उत्तर
तंत्रशास्त्र के आचार्यों ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी उपासना-कर्म की सिद्धि के लिए जप और पाठ आरंभ करने से पूर्व भैरवनाथ का आदेश (आज्ञा या अनुज्ञा) प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है।
भैरव न केवल क्षेत्रपाल हैं, बल्कि उनकी कृपा के बिना कोई भी तांत्रिक सिद्धि पूर्ण नहीं होती।
गुरु ही वह माध्यम है, जो साधक को मंत्र की दीक्षा, सही विधान और देवता का आदेश प्रदान करता है।



