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मंदिर उत्सव📜 जगन्नाथ परंपरा, मंदिर उत्सव1 मिनट पठन

मंदिर में रथ यात्रा का क्या शास्त्रीय विधान है?

संक्षिप्त उत्तर

देवता नगर भ्रमण। रथ (नई लकड़ी, मंत्र) → मूर्ति स्थापना → भक्त खींचें → नगर भ्रमण। पुरी: आषाढ़ शुक्ल, 3 रथ (45 फीट), गुंडिचा (7 दिन)। हम्पी/मदुरै भी।

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विस्तृत उत्तर

रथ यात्रा = देवता नगर भ्रमण — शास्त्रीय:

विधान

  1. 1संकल्प: मंदिर पुरोहित → शुभ मुहूर्त → रथ निर्माण संकल्प।
  2. 2रथ निर्माण: नई लकड़ी (नीम — पुरी)। विशिष्ट शिल्पी। मंत्रोच्चारण।
  3. 3देवता स्थापना: मूर्ति/उत्सव मूर्ति → रथ पर → प्राण प्रतिष्ठा।
  4. 4यात्रा: भक्त रस्सी खींचें → रथ चले → नगर भ्रमण = 'भगवान जनता के बीच'।
  5. 5गुंडिचा (पुरी): जगन्नाथ → गुंडिचा मंदिर (मौसी घर) → 7 दिन → वापसी (बाहुड़ा)।

पुरी = सबसे प्रसिद्ध: आषाढ़ शुक्ल द्वितीया। 3 रथ (जगन्नाथ/बलभद्र/सुभद्रा)। 45 फीट ऊंचे। लाखों भक्त।

अन्य: हम्पी (फरवरी), मदुरै (अलगर), दक्षिण = रथोत्सव प्रचलित।

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शास्त्रीय स्रोत
जगन्नाथ परंपरा, मंदिर उत्सव
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