विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यमदूतों द्वारा जीवात्मा को ले जाने का क्रमबद्ध वर्णन है। मृत्यु के तुरंत पश्चात यमदूत जीव को यमलोक ले जाते हैं जहाँ यमराज और चित्रगुप्त के समक्ष उसके कर्मों का लेखा-जोखा होता है।
गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'दो या तीन मुहूर्त में वह मनुष्य वहाँ पहुँचाया जाता है और यमदूत उसे घोर नरक यातनाओं को दिखाते हैं।' इसके बाद यमराज की आज्ञा से यमदूत उसे पुनः मृत्युलोक लौटा देते हैं जहाँ वह 13 दिनों तक अपने परिजनों के आसपास भटकती है।
इसके पश्चात पिंडदान से शक्ति प्राप्त करके जीवात्मा यमलोक की दीर्घ यात्रा पर निकलती है। यह यात्रा 17 से 49 दिनों तक चलती है और इसमें अनेक कठिनाइयाँ और यातनाएँ हैं। रास्ते में वैतरणी नदी पार करनी होती है।
यमलोक पहुँचने पर यमराज के चार द्वारों में से कर्मानुसार एक से प्रवेश होता है — पूर्व, पश्चिम और उत्तर द्वार पुण्यात्माओं के लिए सुखद हैं, दक्षिण द्वार पापियों के लिए है जो नरक की ओर जाता है।





