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विधान से जुड़े सभी प्रश्न(11)

विधान पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 11 प्रश्न उपलब्ध हैं।

यंत्र साधना

तंत्र में स्वर्ण पत्र पर यंत्र बनाने का क्या विधान है?

सर्वोत्तम (स्वर्ण>रजत>ताम्र>भोजपत्र)। सात्विक, अविनाशी, लक्ष्मी=सोना, सूर्य ऊर्जा। दीपावली/नवरात्रि/अक्षय तृतीया। सिद्ध शिल्पी। प्राण प्रतिष्ठा+सवा लाख। व्यावहारिक: ताम्र = प्रभावी विकल्प।

#स्वर्ण#पत्र#यंत्र
तंत्र सिद्धि

अणिमा सिद्धि प्राप्त करने का तांत्रिक विधान क्या है?

पतंजलि: पंचभूत संयम → अणिमा। तांत्रिक: कुंडलिनी 7 चक्र → सहस्रार। आध्यात्मिक: अहंकार शून्य = सच्ची अणिमा। **चेतावनी: 'सिद्धि = समाधि बाधा!'** मोक्ष > सिद्धि। गुरु+गोपनीय।

#अणिमा#सिद्धि#तांत्रिक
लक्ष्मी पूजा

शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा करने का विशेष विधान क्या है?

शुक्रवार = लक्ष्मी दिन। सफेद/गुलाबी वस्त्र, कमल, कुमकुम, घी दीपक। श्री सूक्त / चालीसा + 108 जप। खीर भोग। व्रत: निराहार/फलाहार, सफेद वस्तु दान। संध्या तुलसी दीपक।

#शुक्रवार#लक्ष्मी#विधान
माला नियम

एकमुखी रुद्राक्ष से जप करने का क्या विधान है?

सर्वदुर्लभ = शिव स्वरूप। 108 माला असंभव — 1 दाना कंठ/पूजा। पंचमुखी माला + एकमुखी धारण = सर्वोत्तम। 'ॐ नमः शिवाय'। नकली बहुत — विश्वसनीय स्रोत।

#एकमुखी#रुद्राक्ष#जप
शिव पूजा विधि

शिव के साथ पार्वती की पूजा करने का विधान क्या है?

शिवलिंग = शिव+पार्वती (जलाधारी = पार्वती)। पहले गणेश → शिव (बेलपत्र) → पार्वती (सिंदूर, श्रृंगार)। शिवलिंग पर सिंदूर वर्जित — पार्वती प्रतिमा पर। दाम्पत्य सुख, मनचाहा वर, कलह निवारण।

#शिव-पार्वती#गौरी#पूजा
मंदिर उत्सव

मंदिर में रथ यात्रा का क्या शास्त्रीय विधान है?

देवता नगर भ्रमण। रथ (नई लकड़ी, मंत्र) → मूर्ति स्थापना → भक्त खींचें → नगर भ्रमण। पुरी: आषाढ़ शुक्ल, 3 रथ (45 फीट), गुंडिचा (7 दिन)। हम्पी/मदुरै भी।

#रथ#यात्रा#शास्त्रीय
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग

रुद्राक्ष का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए किन तीन चीजों का समन्वय आवश्यक है?

रुद्राक्ष का पूरा फल शास्त्र सम्मत विधान, सात्त्विक आचरण और अटूट श्रद्धा के मेल से ही मिलता है।

#पूर्ण लाभ#विधान#आचरण
पूजा एवं उपासना

मृत्युंजय पूजा का विधान कहाँ है?

मृत्युंजय पूजा का विधान गरुड़ पुराण के आचारखण्ड में वर्णित है। इसका सम्बन्ध महामृत्युंजय मंत्र से है, जिसका मूल ऋग्वेद और यजुर्वेद में है। यह पूजा अकाल मृत्यु-निवारण और दीर्घायु के लिए की जाती है।

#मृत्युंजय पूजा#गरुड़ पुराण#महामृत्युंजय
रुद्राक्ष

रुद्राक्ष को दूध में डालकर पहनने का विधान

कच्चा गाय दूध में रातभर → गंगाजल से धोएं → 'ॐ नमः शिवाय' 108 बार → पहनें। दूध = नकारात्मक ऊर्जा शोषित। पहली बार + नियमित (सोमवार/शिवरात्रि)।

#रुद्राक्ष#दूध#शुद्धि
पूजा विधि

पूजा घर में पानी का कलश रखने का विधान क्या है

तांबे के कलश में शुद्ध जल (गंगाजल सहित), स्वस्तिक, मोली, आम के पत्ते और नारियल रखें। ईशान कोण या मूर्तियों के दाहिनी ओर स्थापित करें। नित्य जल बदलें। कलश पूर्णता और मंगल का वैदिक प्रतीक है।

#कलश#पूजा घर#जल
तंत्र साधना

तंत्र शास्त्र में भूत शुद्धि का क्या विधान है?

पंचभूत शुद्धि: लं/वं/रं/यं/हं — 5 चक्रों पर बीज जप। अग्नि(रं)→शरीर भस्म→पुनर्निर्माण (कल्पना)। 'सोऽहम्' = आत्मा भावना। तांत्रिक जप/यंत्र पहले = अनिवार्य। सरल: 5×'ॐ'।

#भूत शुद्धि#विधान#पंचभूत
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