विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में नरक में जीव को किन-किन स्थानों पर ले जाया जाता है, इसका वर्णन है।
पहला पड़ाव — यमराज के दरबार में। मृत्यु के बाद यमदूत जीव को सीधे यमराज के सामने पेश करते हैं।
दूसरा पड़ाव — पहले 24 घंटे में नरक दर्शन। यमदूत जीव को नरक दिखाते हैं और फिर मृत्युलोक वापस छोड़ देते हैं।
तेरहवें दिन के बाद — यमदूत पुनः आकर वास्तविक यात्रा शुरू कराते हैं। जीव को वैतरणी नदी, असिपत्रवन और यमलोक के 16 नगरों से होकर ले जाया जाता है।
दक्षिण द्वार से यमलोक में प्रवेश — पापी जीव को दक्षिण द्वार से ले जाया जाता है।
कर्मानुसार नरक में — यमराज के निर्णय के अनुसार जीव को उस विशेष नरक में ले जाया जाता है जो उसके पाप के लिए निर्धारित है। एक पाप-दंड पूर्ण होने पर अगले नरक में ले जाया जा सकता है।
गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'सदा पापकर्मों में लगे हुए प्राणी एक नरक से दूसरे नरक को, एक दुःख के बाद दूसरे दुःख को प्राप्त होते हैं।'





