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जीवन एवं मृत्यु⏱ 2 मिनट पठन

क्या मृत्यु के बाद तुरंत यात्रा शुरू होती है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद दीर्घ यात्रा तुरंत नहीं होती।

संक्षिप्त उत्तर

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद दीर्घ यात्रा तुरंत नहीं होती। पहले यमलोक जाकर 24 घंटे में वापस आना, 13 दिन परिजनों के पास रहना, फिर पिंडदान के बाद असली यात्रा शुरू होती है जो 17-49 दिन तक चलती है।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद की यात्रा का जो वर्णन है उसके अनुसार यात्रा कुछ चरणों में होती है — तुरंत यमलोक की दीर्घ यात्रा शुरू नहीं होती।

मृत्यु के तुरंत बाद यमदूत जीवात्मा को लेकर यमलोक जाते हैं — गरुड़ पुराण के अनुसार 'दो या तीन मुहूर्त में' वह यमलोक पहुँचाया जाता है जहाँ उसे घोर नरक-यातनाएँ दिखाई जाती हैं। इसके बाद उसी दिन (24 घंटे के भीतर) यमदूत उसे वापस मृत्युलोक छोड़ देते हैं।

मृत्युलोक में आने के बाद जीवात्मा 13 दिनों तक अपने परिजनों के पास रहती है। पिंडदान से उसे शक्ति और नया सूक्ष्म शरीर मिलता है। तेरहवें दिन के बाद यमदूत फिर आते हैं और असली यात्रा शुरू होती है।

यमलोक की दीर्घ यात्रा 17 से 49 दिनों तक चलती है — यह व्यक्ति के कर्मों पर निर्भर है। शास्त्रों में एक वर्ष तक का समय भी बताया गया है।

कुछ विशेष पुण्यात्माएँ जो बहुत उच्च कोटि की होती हैं, वे तुरंत ही नई योनि धारण कर लेती हैं — इसमें क्षण भर से लेकर 30 सेकंड का समय भी हो सकता है।

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