विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यमलोक तक पहुँचने के समय का वर्णन कर्मों के अनुसार भिन्न-भिन्न बताया गया है।
प्रथम यात्रा — मृत्यु के तुरंत बाद यमदूत जीव को यमलोक ले जाते हैं और 'दो-तीन मुहूर्त' में (तत्काल) पहुँचा देते हैं। वहाँ नरक यातनाएँ दिखाकर उसी दिन वापस मृत्युलोक छोड़ देते हैं।
दीर्घ यात्रा — 13 दिन बाद, पिंडदान के पश्चात, असली यात्रा शुरू होती है। गरुड़ पुराण में इस यात्रा को 17 दिन से 47 दिन तक बताया गया है। कुछ वर्णनों में एक वर्ष का उल्लेख भी मिलता है। यह सब जीव के कर्मों पर निर्भर है।
पापी जीव के लिए — वैतरणी नदी पार करने में 34-47 दिन लग सकते हैं। रास्ते में बार-बार गिरना, बेहोश होना — इससे यात्रा और लंबी हो जाती है।
पुण्यात्मा के लिए — देवदूत दिव्य विमान में शीघ्र ले जाते हैं, कोई विलंब नहीं।
गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'मृत आत्मा को पृथ्वीलोक से यमलोक तक जाने में एक वर्ष का समय लग सकता है।'





