विस्तृत उत्तर
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड के हिमालय में 3,583 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में 11वाँ और पंचकेदार में प्रथम है।
शिव पुराण में दो मुख्य कथाएं मिलती हैं। पहली कथा के अनुसार हिमालय के केदार श्रृंग पर भगवान विष्णु के अवतार महातपस्वी नर और नारायण ऋषि तपस्या करते थे। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर शिव जी ज्योतिर्लिंग रूप में वहाँ सदा के लिए विराजित हो गए।
दूसरी प्रसिद्ध कथा पांडवों से जुड़ी है। महाभारत युद्ध में विजय के बाद पाँचों पांडव भ्रातृहत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की शरण में गए। शिव पांडवों से रुष्ट थे इसलिए अंतर्ध्यान होकर केदार पर्वत पर भैंसे के रूप में अन्य पशुओं में मिल गए। भीम ने विशालकाय रूप धारण करके दो पहाड़ों पर पैर फैलाए — सभी पशु निकल गए, परंतु भैंसे रूपी शिव नहीं निकले। भीम ने उनकी पीठ पकड़ी तो शिव पाताल में समाने लगे — भीम ने पीठ (त्रिकोणाकार कूबड़) पकड़ लिया।
शिव पांडवों की भक्ति से प्रसन्न हुए, उन्हें पाप-मुक्ति दी। वह त्रिकोणाकार पीठ का भाग केदारनाथ में पूजित हुआ। शिव के अन्य अंग भी अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए — यही पंचकेदार हैं।





