विस्तृत उत्तर
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे जिले में सह्याद्री पर्वत पर स्थित है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में छठा है और 'मोटेश्वर महादेव' के नाम से भी जाना जाता है।
शिव पुराण में इसकी कथा इस प्रकार है — रावण के भाई कुंभकर्ण की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी कर्कटी के गर्भ से पुत्र भीमा का जन्म हुआ। कर्कटी सह्याद्री पर्वत पर रहती थी और उसने भीमा को पिता की मृत्यु की सच्चाई बचपन में नहीं बताई। जब भीमा को पता चला कि भगवान श्रीराम (विष्णु अवतार) ने उसके पिता कुंभकर्ण का वध किया था, तो वह क्रोध में भर गया।
प्रतिशोध के लिए भीमा ने ब्रह्मा की घोर तपस्या की और अजेय होने का वरदान प्राप्त किया। वरदान पाकर वह अत्यंत उन्मत्त हो गया — उसने देवताओं को परास्त किया, सभी पूजा-पाठ बंद करा दिए और तीनों लोकों में आतंक मचाया। विवश देवता भगवान शिव की शरण में गए।
भगवान शिव ने देवताओं की पुकार सुनी। भीमा ने एक शिवलिंग पर प्रहार किया, उसी क्षण शिव ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए और भीमा का संहार कर दिया। देवताओं के अनुरोध पर शिव वहाँ भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजित हो गए। मान्यता है कि शिव के शरीर के पसीने से भीमा नदी का उद्गम हुआ।





