विस्तृत उत्तर
नारायणास्त्र से बचने का एकमात्र उपाय है — पूर्ण आत्मसमर्पण। यह पुराणों का एक अत्यंत गहरा आध्यात्मिक संदेश भी है।
व्यावहारिक उपाय इस प्रकार है — सभी अस्त्र-शस्त्र तुरंत जमीन पर रख देना। मन में भी युद्ध और प्रतिरोध का कोई विचार न रखना। हाथ जोड़कर और झुककर नारायणास्त्र की शरण में आ जाना। भगवान नारायण (विष्णु) का नाम लेकर उनकी शरण ग्रहण करना।
महाभारत में इसका व्यावहारिक प्रदर्शन — जब अश्वत्थामा ने यह अस्त्र छोड़ा, श्रीकृष्ण ने तत्काल सबको निर्देश दिया। जिसने शस्त्र उठाए रखे वह नष्ट हुआ। भीम ने वीरता दिखाने की कोशिश की परंतु नारायणास्त्र के सामने टिक नहीं पाए। अंत में उन्होंने भी आत्मसमर्पण किया और बच गए।
आध्यात्मिक अर्थ — यह अस्त्र इस दर्शन का प्रतीक है कि जगत के पालनकर्ता भगवान नारायण के सामने अहंकार और युद्ध-भाव छोड़कर जो शरण लेता है, उसे कोई शक्ति हानि नहीं पहुँचा सकती। नारायणास्त्र को केवल एक बार चलाया जा सकता था — दूसरी बार नहीं।





