विस्तृत उत्तर
काशी में मरने पर मोक्ष मिलने की मान्यता हिंदू धर्म में सहस्त्रों वर्षों से चली आ रही है और इसका आधार शिव पुराण, स्कंद पुराण और काशीखंड जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।
तारक मंत्र का रहस्य: शास्त्रों के अनुसार काशी में जब कोई प्राणी देहावसान के निकट होता है, तब स्वयं भगवान शिव उसके कान में 'तारक मंत्र' का उपदेश देते हैं। यह मंत्र परम मुक्तिदायी है — इसके प्रभाव से घोर से घोर पापी भी संसार के आवागमन के बंधन से मुक्त हो जाता है। इस कारण काशी को 'अविमुक्त क्षेत्र' कहते हैं — अर्थात वह क्षेत्र जिसे शिव कभी नहीं छोड़ते।
काशी को शिव की नगरी इसलिए माना जाता है क्योंकि शिव पुराण के अनुसार उन्होंने स्वयं इस पाँच कोस की नगरी को संसार से अलग करके अपने त्रिशूल पर धारण किया है। प्रलय में भी यह नगरी नष्ट नहीं होती।
मणिकर्णिका घाट का महत्व: यहाँ अनादि काल से चिता की अग्नि कभी नहीं बुझती — कहा जाता है कि यहाँ शव का दहन भगवान शिव स्वयं देखते हैं और आत्मा को मोक्ष देते हैं। पौराणिक मान्यता है कि भगवान विष्णु के तप से निकली स्वेद बूंद (मणि) यहाँ गिरी थी, और शिव ने वचन दिया था कि यह स्थान मुक्तिद्वार बनेगा।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण: काशी में जीवन और मृत्यु का सह-अस्तित्व है — एक घाट पर गंगा आरती, दूसरे पर दाह-संस्कार। यह नगरी साधक को मृत्यु की अनिवार्यता स्वीकार करना सिखाती है। जो मृत्यु को समझ लेता है, वही वास्तविक रूप से मुक्त होता है — और काशी यही बोध देती है।





