ज्योतिर्लिंगकाशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व शिव पुराण में क्या बताया गया है?शिव पुराण के अनुसार काशी शिव की नगरी है जो प्रलय में भी नष्ट नहीं होती। यहाँ मृत्यु पर शिव स्वयं तारक मंत्र देते हैं, इसलिए काशी मोक्षदायिनी है। विश्वनाथ के दर्शन मात्र से समस्त तीर्थों का फल मिलता है।#काशी विश्वनाथ#मोक्ष#तारक मंत्र
मोक्ष मार्गकाशी में मरने से मोक्ष मिलता है क्या — सच?शास्त्र (काशी खंड): हाँ — शिव तारक मंत्र सुनाते हैं। मणिकर्णिका = मोक्ष। पर कबीर: 'बिना ज्ञान मोक्ष नहीं।' गीता: कर्म+ज्ञान+भक्ति = मोक्ष, स्थान नहीं। काशी सहायक, एकमात्र कारण नहीं।
वाराणसी और पार्वती प्रश्नकाशी को अविमुक्त क्षेत्र क्यों कहा गया है?वाराणसीपुरी को अविमुक्त क्षेत्र कहा गया है, जहाँ शिव और रुद्राणी का संवाद बताया गया है।#काशी#वाराणसी#अविमुक्त क्षेत्र
वाराणसी और पार्वती प्रश्नवाराणसी में पार्वती ने शिव से क्या पूछा?पार्वती ने पूछा कि तप, विद्या, योग आदि किस साधन से शिव वश में होते, पूजित होते और दर्शन देते हैं।#वाराणसी#पार्वती#शिव
तीर्थ माहात्म्यवाराणसी माहात्म्य किसके साथ वर्णित है?वाराणसी माहात्म्य क्षेत्रमाहात्म्य, लिङ्ग-उपासना, स्नानविधि और शौचाचार के प्रसंगों के साथ वर्णित है।#वाराणसी#क्षेत्र माहात्म्य#शिवलिंग
प्रमुख मंदिरमाँ ब्रह्मचारिणी का प्रमुख मंदिर कहाँ है?माँ ब्रह्मचारिणी का प्रमुख मंदिर: वाराणसी (काशी) के बलाजी घाट पर स्थित ब्रह्मचारिणी देवी मंदिर। नवरात्रि के दूसरे दिन भक्तों की भीड़ + विशेष पूजा-अर्चना।#ब्रह्मचारिणी मंदिर#वाराणसी#बलाजी घाट
प्रमुख मंदिरमाँ स्कंदमाता के प्रमुख मंदिर कहाँ हैं?स्कंदमाता के प्रमुख मंदिर: कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) = खखनाल गाँव के निकट गुफा मंदिर। वाराणसी = स्कंदमाता मंदिर। दिल्ली = पटपड़गंज इलाके में मंदिर।#स्कंदमाता मंदिर#कुल्लू हिमाचल#वाराणसी
असितांग भैरव परिचय और स्वरूपभैरव को काशी का कोतवाल क्यों कहते हैं?भैरव को काशी का कोतवाल इसलिए कहते हैं क्योंकि उनकी शक्ति स्थूल और सूक्ष्म दोनों स्तरों पर रक्षा करती है — वे क्षेत्रपाल हैं और उनका वाहन श्वान इसका प्रतीक है।#काशी कोतवाल#वाराणसी#क्षेत्रपाल
तीर्थ स्थानकाशी में कालसर्प पूजा का क्या महत्व है?काशी महा-श्मशान है जहाँ मृत्यु पर विजय (मोक्ष) मिलती है — कालसर्प योग का सबसे बड़ा लक्षण मृत्यु-भय है इसलिए काशी में पूजा अत्यंत प्रभावी है।#काशी#वाराणसी#महाश्मशान
काशी के शिवलिंगकुक्कुटेश्वर शिवलिंग वाराणसी में कहाँ स्थित है?यह वाराणसी के भेलूपुर स्थित दुर्गा कुण्ड क्षेत्र में दुर्गा मंदिर के दक्षिणी द्वार के ठीक बाहर स्थित है। यह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से लगभग 1.3 किलोमीटर उत्तर में है।#दुर्गा कुण्ड#भेलूपुर#भौगोलिक स्थिति
काशी के शिवलिंगघंटाकर्णेश्वर महादेव मंदिर कहाँ है — काशी में सटीक स्थानवाराणसी के कर्णघंटा मोहल्ले (K 60/66) में — चौक और मैदागिन के बीच। समीप ही घंटाकर्ण हृद (कर्णघंटा तालाब — K 60/67) और व्यासेश्वर महादेव का मंदिर भी है।#घंटाकर्णेश्वर महादेव#काशी#वाराणसी
तीर्थ एवं धार्मिक स्थलकाशी की पाँच कोसी परिक्रमा की विधिकाशी विश्वनाथ के दर्शन और ज्ञानवापी जल से संकल्प लेकर, मणिकर्णिका घाट के चक्र पुष्करिणी कुंड से 84 किलोमीटर की परिक्रमा आरंभ होती है। पाँच पड़ावों पर विश्राम करते हुए यह पंचकोसी यात्रा पूर्ण होती है।#काशी परिक्रमा#पंचकोसी यात्रा#वाराणसी
तीर्थ एवं धामकाशी में मरने पर मोक्ष क्यों मिलता है?काशी में शिव स्वयं मरने वाले के कान में तारक मंत्र देते हैं जिससे पापी भी मोक्ष पाता है। काशी शिव का अविमुक्त क्षेत्र है जिसे वे कभी नहीं छोड़ते। मणिकर्णिका घाट पर दाह-संस्कार से आत्मा सीधे मोक्ष पाती है।#काशी#मोक्ष#तारक मंत्र
तीर्थ एवं धामकाशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का रहस्य क्या है?काशी विश्वनाथ का सबसे बड़ा रहस्य तारक मंत्र है — यहाँ मरने वाले के कान में स्वयं शिव मुक्तिदायक मंत्र का उपदेश करते हैं, इसीलिए काशी मोक्ष नगरी है। काशी शिव के त्रिशूल पर बसी है इसलिए प्रलय में भी नष्ट नहीं होती।#काशी#विश्वनाथ#ज्योतिर्लिंग
शिव मंदिरकाशी विश्वनाथ मंदिर में शिव पूजा की परंपरा अन्य मंदिरों से कैसे अलग है?काशी = 'अविमुक्त क्षेत्र' — शिव कभी नहीं छोड़ते (स्कन्द पुराण काशीखंड)। विशेष: पंचक्रोशी यात्रा (108 मंदिर), मणिकर्णिका स्नान अनिवार्य, सीधे गंगाजल अभिषेक, ब्रह्ममुहूर्त मंगला आरती, विस्तृत भोग, निर्माल्य अपवाद। दर्शन मात्र से मोक्ष मार्ग।#काशी विश्वनाथ#वाराणसी#परंपरा