विस्तृत उत्तर
काशी की पंचकोसी यात्रा एक अत्यंत प्राचीन धार्मिक परिक्रमा है, जो काशी क्षेत्र की 25 कोस — लगभग 84 किलोमीटर — की परिक्रमा करती है। यह यात्रा मुख्यतः महाशिवरात्रि से एक दिन पूर्व आरंभ होती है। परिक्रमा की विधि इस प्रकार है — सबसे पहले श्रद्धालु काशी विश्वनाथ के दर्शन करके ज्ञानवापी कूप के जल से संकल्प लेते हैं। फिर मणिकर्णिका घाट पर स्थित चक्र पुष्करिणी कुंड में स्नान करके वहाँ से यात्रा आरंभ होती है। यह यात्रा कंदवा तालाब से गुजरती है और पाँच मुख्य पड़ावों पर विश्राम करती है। पाँचों पड़ावों पर भव्य शिव मंदिर हैं। परिक्रमा पथ पर दाहिनी ओर क्रमांकित लाल मंदिरों की एक पूरी श्रृंखला है। यात्रा के दौरान ब्रह्मचर्य पालन और पवित्र आचरण अपेक्षित है। चैत्र शुक्ल तृतीया से पंचमी के बीच और मार्गशीर्ष माह को भी यात्रा के लिए शुभ माना गया है। शास्त्रीय मान्यता है कि इस परिक्रमा के सम्पन्न होने से काशी क्षेत्र के सभी देवी-देवताओं के दर्शन का पुण्य एक साथ प्राप्त होता है, मन के पाँचों विकार दूर होते हैं और मनुष्य पाप मुक्त होकर सद्गति को प्राप्त होता है। काशी को मुक्ति की नगरी कहा जाता है और यहाँ की परिक्रमा को मोक्षदायिनी माना गया है।





