विस्तृत उत्तर
जम्मू-कश्मीर की बर्फीली घाटियों में 12,756 फीट की ऊँचाई पर स्थित अमरनाथ की पवित्र गुफा में हर वर्ष एक अद्भुत प्राकृतिक हिम शिवलिंग प्रकट होता है, जिसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग या बाबा बर्फानी कहते हैं। इसके निर्माण की प्रक्रिया इस प्रकार है — गुफा की छत से पानी की बूंदें एक निश्चित स्थान पर एक-एक करके टपकती हैं। यह बूंदें नीचे गिरते ही जमकर बर्फ का रूप ले लेती हैं और धीरे-धीरे लगभग 10 से 18 फीट तक ऊँचे ठोस शिवलिंग का आकार ग्रहण कर लेती हैं। इस शिवलिंग की एक अत्यंत विस्मयकारी विशेषता यह है कि इसका आकार चंद्रमा की कलाओं के साथ घटता-बढ़ता है। श्रावण पूर्णिमा को यह अपने पूर्ण आकार में होता है और अमावस्या तक क्रमशः छोटा होता जाता है। आस-पास की बर्फ कच्ची और भुरभुरी होती है, जबकि इस शिवलिंग की बर्फ पूरी तरह ठोस होती है — यह वैज्ञानिक दृष्टि से भी अचंभित करने वाला तथ्य है। अकबर के इतिहासकार अबुल फजल ने आइन-ए-अकबरी में 16वीं शताब्दी में इसका उल्लेख किया है और कल्हण की राजतरंगिणी में भी कश्मीर के राजाओं के बाबा बर्फानी के भक्त होने का वर्णन है। पौराणिक कथा के अनुसार इसी गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर होने का रहस्य — अमर कथा — सुनाई थी, इसीलिए इस स्थान का नाम अमरनाथ पड़ा। आषाढ़ पूर्णिमा से रक्षाबंधन तक प्रतिवर्ष लाखों शिव भक्त इस दिव्य हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए कठिन यात्रा करते हैं।





