विस्तृत उत्तर
साधक को अपनी आज्ञा चक्र में या हृदय-कमल में एक द्वादश-ज्योतिर्लिंग (जैसे त्र्यंबकेश्वर या नागेश्वर) का ध्यान करना चाहिए।
ध्यान करें कि वह शिवलिंग करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाशमान है, और भगवान 'वासुकि' या 'शेषनाग' उस शिवलिंग पर लिपटे हुए हैं।
नाग-मंत्रों की साधना में यह ध्यान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चेतना को सर्प-ऊर्जा के उग्र रूप से बचाता है।





