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ध्यान विधि📜 भगवद् गीता — ध्यान योग (6वाँ अध्याय), पातंजल योग सूत्र, उपनिषद2 मिनट पठन

पूजा के दौरान ध्यान कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

पूजा में ध्यान: स्थिर आसन, तीन गहरी साँसें, आँखें बंद करके इष्ट देव का स्वरूप मन में देखें। मंत्र मन में दोहराएं। देवता के सामने बालक की तरह भाव — पूर्ण समर्पण। गीता 6.10: 'ध्यानी एकांत में आत्मा को परमात्मा में लगाए।'

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विस्तृत उत्तर

पूजा में ध्यान की विधि भगवद् गीता के छठे अध्याय और पातंजल योग सूत्र में वर्णित है:

पूजा ध्यान की सरल विधि

1आसन

स्थिर और आरामदायक आसन में बैठें। पद्मासन, सुखासन या वज्रासन।

2श्वास

तीन गहरी साँसें लें। श्वास पर ध्यान — मन को वर्तमान में लाएं।

3देव का ध्यान

आँखें बंद करके अपने इष्ट देव का स्वरूप मन में देखें:

  • विष्णु — पीत वस्त्र, शंख-चक्र-गदा-पद्म
  • शिव — ज्योतिर्लिंग, सफेद वर्ण, त्रिशूल
  • दुर्गा — सिंह पर सवार, दस भुजाएं

4मंत्र

इष्ट देव का बीज मंत्र मन में दोहराते रहें:

  • विष्णु: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  • शिव: ॐ नमः शिवाय
  • दुर्गा: ॐ दुं दुर्गायै नमः

5भाव

देवता के सामने अपने आप को बालक की तरह महसूस करें — माँ/पिता के सामने नन्हा शिशु।

6समर्पण

मन में सोचें — 'मेरा सब कुछ आपको अर्पित है।'

भगवद् गीता (6.10)

योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः' — ध्यानी एकांत में आत्मा को निरंतर परमात्मा में लगाए।
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शास्त्रीय स्रोत
भगवद् गीता — ध्यान योग (6वाँ अध्याय), पातंजल योग सूत्र, उपनिषद
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