विस्तृत उत्तर
पूजा में ध्यान की विधि भगवद् गीता के छठे अध्याय और पातंजल योग सूत्र में वर्णित है:
पूजा ध्यान की सरल विधि
1आसन
स्थिर और आरामदायक आसन में बैठें। पद्मासन, सुखासन या वज्रासन।
2श्वास
तीन गहरी साँसें लें। श्वास पर ध्यान — मन को वर्तमान में लाएं।
3देव का ध्यान
आँखें बंद करके अपने इष्ट देव का स्वरूप मन में देखें:
- ▸विष्णु — पीत वस्त्र, शंख-चक्र-गदा-पद्म
- ▸शिव — ज्योतिर्लिंग, सफेद वर्ण, त्रिशूल
- ▸दुर्गा — सिंह पर सवार, दस भुजाएं
4मंत्र
इष्ट देव का बीज मंत्र मन में दोहराते रहें:
- ▸विष्णु: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- ▸शिव: ॐ नमः शिवाय
- ▸दुर्गा: ॐ दुं दुर्गायै नमः
5भाव
देवता के सामने अपने आप को बालक की तरह महसूस करें — माँ/पिता के सामने नन्हा शिशु।
6समर्पण
मन में सोचें — 'मेरा सब कुछ आपको अर्पित है।'
भगवद् गीता (6.10)
योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः' — ध्यानी एकांत में आत्मा को निरंतर परमात्मा में लगाए।





