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ध्यान विधि📜 भागवत पुराण — भक्ति भाव, भगवद् गीता (9.34), उपनिषद1 मिनट पठन

पूजा के दौरान क्या सोचें?

संक्षिप्त उत्तर

पूजा में सोचें: कृतज्ञता ('आपने इतना दिया'), समर्पण ('सब आपका है'), इष्ट देव का स्वरूप — चरण से मुकुट तक। गीता 9.34: 'मुझमें मन लगाओ।' बालक का भाव — माँ-बाप के सामने। व्यापार-समस्या-जल्दी — पूजा में नहीं।

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विस्तृत उत्तर

पूजा के दौरान मन में क्या रखें — इसका वर्णन भागवत पुराण और भगवद् गीता में मिलता है:

भगवद् गीता (9.34)

> 'मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।

> मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः।'

— मुझमें मन लगाओ, मेरे भक्त बनो, मेरी पूजा करो, मुझे नमस्कार करो — ऐसा करने वाला मुझे प्राप्त होगा।

पूजा के दौरान मन में

1कृतज्ञता

हे भगवान, आपने मुझे जीवन, परिवार, स्वास्थ्य दिया — धन्यवाद।

2समर्पण

मेरा सब कुछ — मन, शरीर, कर्म — आपको अर्पित है।

3देव का स्वरूप

इष्ट देव का सुंदर स्वरूप मन में देखें। प्रत्येक अंग को देखें — चरण से मुकुट तक।

4मंत्र का अर्थ

जो मंत्र बोल रहे हों, उसका अर्थ मन में रखें।

5बच्चे का भाव

माता-पिता के सामने बालक का भाव — निर्भय, निश्चिंत, प्रेमपूर्ण।

क्या न सोचें

  • व्यापार, पैसे, समस्याएं
  • दूसरों की बुराई
  • पूजा की जल्दी
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शास्त्रीय स्रोत
भागवत पुराण — भक्ति भाव, भगवद् गीता (9.34), उपनिषद
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