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ध्यान विधि📜 भगवद् गीता (6.11-13), पातंजल योग सूत्र — धारणा, उपनिषद2 मिनट पठन

पूजा के समय ध्यान कैसे लगाएं?

संक्षिप्त उत्तर

ध्यान कैसे: (1) शांत स्थान, मोबाइल दूर (2) रीढ़ सीधी, शरीर ढीला (3) तीन गहरी साँसें (4) आँखें बंद, इष्ट देव का स्वरूप (5) मंत्र श्वास के साथ। मन भटके तो — गीता 6.26: वहाँ से खींचकर इष्ट देव पर लाओ। यही अभ्यास है।

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विस्तृत उत्तर

पूजा में ध्यान लगाने की विधि भगवद् गीता और पातंजल योग सूत्र में वर्णित है:

5 चरणों में ध्यान

चरण 1 — स्थान

शांत, स्वच्छ स्थान। बाहरी विक्षेप कम करें — दरवाजा बंद, मोबाइल दूर।

चरण 2 — शरीर

रीढ़ सीधी, कंधे ढीले, हाथ गोद में। जम्हाई/खिंचाव लेकर शरीर को ढीला करें।

चरण 3 — श्वास

तीन गहरी साँसें — धीरे-धीरे श्वास लें और छोड़ें। मन वर्तमान में आ जाता है।

चरण 4 — देव का स्मरण

आँखें बंद या आधी बंद। इष्ट देव के चरण से ध्यान शुरू करें — ऊपर की ओर जाएं — पूरे स्वरूप का ध्यान।

चरण 5 — मंत्र

इष्ट मंत्र मन में दोहराएं — श्वास के साथ। 'ॐ नमः शिवाय' — एक श्वास में 'ॐ नमः', दूसरे में 'शिवाय'।

गीता (6.13)

नासिकाग्रे दृष्टिम् अवस्थाप्य' — नाक की नोक पर दृष्टि — सरल और प्रभावशाली ध्यान।

यदि मन भटके

गीता 6.26 — 'जहाँ मन जाए, वहाँ से खींचकर इष्ट देव पर लाओ।' यही अभ्यास है।

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शास्त्रीय स्रोत
भगवद् गीता (6.11-13), पातंजल योग सूत्र — धारणा, उपनिषद
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