विस्तृत उत्तर
शस्त्र वे पारंपरिक हथियार हैं जिन्हें चलाने के लिए योद्धा की शारीरिक शक्ति और कौशल की आवश्यकता होती है। तलवार, गदा, भाला और परशु जैसे हथियार इसी श्रेणी में आते हैं। ये हाथ में पकड़कर चलाए जाते हैं और इनकी मारक क्षमता योद्धा के बल पर निर्भर करती है। इसके विपरीत अस्त्र वे दिव्य हथियार थे जिन्हें विशेष मंत्रों के उच्चारण द्वारा जागृत और निर्देशित किया जाता था। प्रत्येक अस्त्र के एक अधिपति देवता होते थे और उस अस्त्र में उसी देवता की शक्ति का अंश निवास करता था। यह अंतर केवल तकनीकी नहीं बल्कि दार्शनिक भी है। शस्त्र मनुष्य के पुरुषार्थ का प्रतीक है जबकि अस्त्र दैवीय हस्तक्षेप और ब्रह्मांडीय शक्ति का।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





