विस्तृत उत्तर
वैष्णवास्त्र और नारायणास्त्र दोनों भगवान विष्णु के अत्यंत शक्तिशाली दिव्यास्त्र हैं और दोनों से बचने का उपाय पूर्ण समर्पण है। परंतु इनमें कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं। लक्ष्य क्षमता में — नारायणास्त्र एक साथ अनेक लक्ष्यों को भेदने की क्षमता रखता था जबकि वैष्णवास्त्र मुख्यतः एकल लक्ष्य के लिए प्रयुक्त होता था। प्रयोग की सीमा में — नारायणास्त्र को एक युद्ध में केवल एक ही बार प्रयोग किया जा सकता था, दूसरी बार प्रयोग पर यह अपनी ही सेना को नष्ट करता था। वैष्णवास्त्र के लिए ऐसा कोई स्पष्ट नियम नहीं मिलता। प्राप्ति में — नारायणास्त्र का ज्ञान गुरु द्रोणाचार्य ने दिया था जबकि वैष्णवास्त्र का ज्ञान सीधे भगवान विष्णु से प्राप्त होता था।
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