विस्तृत उत्तर
नागास्त्र और नागपाश एक ही शक्ति के दो अलग-अलग रूप थे, जिनका उद्देश्य भिन्न था। नागास्त्र एक आक्रामक और संहारक अस्त्र था। इसके प्रयोग से युद्धभूमि में अनगिनत विषैले सर्प प्रकट हो जाते थे जो शत्रु सेना पर टूट पड़ते थे और उनमें हाहाकार मचा देते थे। इसका मुख्य उद्देश्य शत्रु को मारना, घायल करना या उसकी सेना को तितर-बितर करना था। यह आकाश से बरसती विष की वर्षा के समान था। इसके विपरीत नागपाश एक बंधनकारी अस्त्र था। इसका लक्ष्य शत्रु का वध करना नहीं, बल्कि उसे जीवित पकड़ना, असहाय बनाना या युद्ध से विरक्त करना था। यह अस्त्र चलते ही सर्पों की रस्सियों का रूप ले लेता था और शत्रु को पूरी तरह से जकड़ लेता था, जिससे उसका हिलना-डुलना भी असंभव हो जाता था।
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