विवाह संस्कारविवाह सात जन्मों का बंधन क्यों कहते?अग्नि साक्षी+सात फेरे=अटूट। पुनर्जन्म: दो आत्माओं Karmic bond। '7'=पूर्णता। गहरा अर्थ: 'हमेशा'=कठिनाई में भी साथ। आधुनिक: 7 जन्म=प्रतिबद्धता प्रतीक, बंधन नहीं=प्रेम गहराई।#सात जन्म#विवाह#बंधन
दिव्यास्त्रनागास्त्र और नागपाश में क्या अंतर है?नागास्त्र एक संहारक अस्त्र था जो शत्रु को मारता था, जबकि नागपाश एक बंधनकारी अस्त्र था जो शत्रु को जीवित जकड़ लेता था।#नागास्त्र#नागपाश#अंतर
मंत्र का स्वरूप और अर्थ'उर्वारुकमिव बन्धनान्' का क्या अर्थ है?'उर्वारुकमिव' = ककड़ी की भांति; 'बन्धनान्' = डंठल की कैद से। पका फल जैसे सहज बेल से अलग होता है — वैसे ही सहज मृत्यु की प्रार्थना। साथ ही 'उर्वा' = विशाल रोग, इन प्राणघातक रोगों के बंधन काटना।#उर्वारुकमिव#ककड़ी#बंधन
पारद शिवलिंग निर्माणपारद शिवलिंग कैसे बनता है?पारद शिवलिंग 'बनाया' नहीं, 'सिद्ध' किया जाता है — तरल पारे को अनेक रस-शास्त्रीय संस्कारों से शोधित करके अंत में 'बंधन' प्रक्रिया से ठोस स्वरूप दिया जाता है।#पारद शिवलिंग निर्माण#रस शास्त्र#अष्ट संस्कार
शिव-नाग संयुक्त सिद्धांतनाग को पाश क्यों कहा जाता है?नाग को पाश इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह जीव को कर्म-बंधन में बाँधता है — जो बंधन सामान्य जीव के लिए पाश है, वही शिव के लिए आभूषण है।#नाग पाश#बंधन#कर्म
पाशुपत अस्त्र साधनापाशुपत दर्शन में 'पाश' का क्या तात्पर्य है?माया, मोह, अज्ञान और कर्म के वे बंधन जो जीव को बांधकर रखते हैं, 'पाश' कहलाते हैं।#पाश#बंधन#माया
जीवन एवं मृत्युनरक में जीव को कहाँ बांधा जाता है?नरक में जीव को गले-हाथ-पैरों में जंजीरों से, पाश और अंकुश से, लोहे के खंभों से बाँधकर रखा जाता है। यह बंधन जीवन के पाप-बंधनों का स्थूल प्रतिरूप है।#नरक#बंधन#जंजीर
जीवन एवं मृत्युनरक में जीव को क्यों भागने नहीं दिया जाता?नरक से जीव इसलिए नहीं भाग सकता क्योंकि यमदूत चारों ओर हैं, जंजीरों में बँधा है, कर्म का नियम है कि फल भोगना अनिवार्य है और 'बिना भोगे कर्म का नाश नहीं होता।'#नरक#भागना#बंधन
जीवन एवं मृत्युनरक में जीव को कैसे बांधा जाता है?गरुड़ पुराण में नरक में जीव को पाश (रस्सी), जंजीर (गले-हाथ-पैर), अंकुश और पीठ पर लोहे के भार से बाँधा जाता है। यह उसी बंधन का प्रतीक है जिसमें वह जीवन भर पापकर्मों से जकड़ा रहा।#नरक#बंधन#जंजीर
जीवन एवं मृत्युयमदूत जीव को बांधकर क्यों ले जाते हैं?यमदूत पापी जीव को इसलिए बाँधकर ले जाते हैं क्योंकि वह मोह के कारण स्वयं नहीं जाना चाहता और शरीर में लौटने का प्रयास करता है। यह कर्म-न्याय की अनिवार्यता का प्रतीक है। पुण्यात्मा को कभी नहीं बाँधा जाता।#यमदूत#बंधन#कर्मफल
जीवन एवं मृत्युयमदूतों के हाथ में पाश का क्या महत्व है?यमदूतों का पाश पापकर्मों का बंधन है, कर्म-न्याय की अनिवार्यता का प्रतीक है और मोह-आसक्ति का स्थूल रूप है। यह बताता है कि कोई भी अपने कर्मफल से नहीं बच सकता। पाश में बँधा जीव शरीर और परिजनों के पास नहीं लौट सकता।#पाश#यमदूत#बंधन
जीवन एवं मृत्युक्या यमदूत जीव को बांधते हैं?हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार यमदूत पापी जीव के गले में पाश (रस्सी) बाँधते हैं। यह पाश पापकर्मों का प्रतीक है। इसी बंधन के कारण जीवात्मा अपने शरीर में वापस नहीं लौट सकती। पुण्यात्मा के लिए कोई बंधन नहीं होता।#यमदूत#पाश#बंधन