विस्तृत उत्तर
पारद शिवलिंग का निर्माण सामान्य ढलाई की प्रक्रिया नहीं है; यह एक अत्यंत जटिल, गुह्य और रहस्यमयी 'रस-शास्त्रीय' प्रक्रिया है।
पारद शिवलिंग 'बनाया' नहीं जाता, अपितु उसे 'सिद्ध' किया जाता है। तरल पारे को ठोस, दिव्य और पूजनीय स्वरूप में लाने के लिए उसे अनेकों 'संस्कारों' से शोधित और सिद्ध किया जाता है।
प्रमुख रस-शास्त्रीय ग्रंथ जैसे 'रसरत्नसमुच्चय' और 'रसार्णव तंत्र' इन प्रक्रियाओं का वर्णन करते हैं।
अष्ट-संस्कारों से सिद्ध होने के पश्चात्, पारद 'बंधन' के योग्य होता है। यह अंतिम प्रक्रिया है, जिसमें संस्कारित पारद को विशिष्ट दिव्य औषधियों या अन्य शुद्ध धातुओं (जैसे चांदी) के योग से एक जटिल प्रक्रिया द्वारा ठोस ('बद्ध') स्वरूप प्रदान किया जाता है। यही ठोस, सिद्ध और संस्कारित पारद 'पारद शिवलिंग' कहलाता है।





