विस्तृत उत्तर
अष्ट-संस्कारों से सिद्ध होने के पश्चात्, पारद 'बंधन' के योग्य होता है। यह अंतिम प्रक्रिया है, जिसमें संस्कारित पारद को विशिष्ट दिव्य औषधियों या अन्य शुद्ध धातुओं (जैसे चांदी) के योग से एक जटिल प्रक्रिया द्वारा ठोस ('बद्ध') स्वरूप प्रदान किया जाता है।
यही ठोस, सिद्ध और संस्कारित पारद 'पारद शिवलिंग' कहलाता है।





