विस्तृत उत्तर
मूर्छना एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है। 'मूर्छना' का शाब्दिक अर्थ है 'अचेत होना'।
इस प्रक्रिया द्वारा पारद अपने चंचल, द्रव और विषैले स्वरूप का 'नाश' करता है। विभिन्न वनस्पतियों के साथ मर्दन करने पर पारद अपनी धात्विक चमक और तरलता खोकर एक कृष्ण-वर्णी (काले) चूर्ण (कज्जली) या नष्ट-पिष्ट स्वरूप में परिवर्तित हो जाता है।
यह संस्कार पारद के विष-दोष को समाप्त कर उसमें 'रोगनाशक' और दिव्य शक्ति उत्पन्न करता है।





