का सरल उत्तर
मूर्छना संस्कार में पारद अपनी चंचलता और विषैला स्वरूप खोकर काले चूर्ण (कज्जली) में परिवर्तित होता है — इससे विष-दोष नष्ट होकर रोगनाशक और दिव्य शक्ति उत्पन्न होती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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