विस्तृत उत्तर
अभिषेक के पश्चात शिवलिंग से स्पर्श होकर निकलने वाला जल मात्र जल नहीं रहता, वह शिव के स्पंदनों से युक्त होकर 'तीर्थोदक' (चरणामृत) बन जाता है। इस जल को अत्यंत दिव्य और सर्व-रोगनाशक माना गया है।
यजमान को इस जल का पान करना चाहिए और इसे घर के सभी कोनों और सदस्यों पर छिड़कना चाहिए, जिससे:
— घर की संपूर्ण नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाए
— वास्तु दोष नष्ट हो जाएं।
तत्पश्चात शिव का नैवेद्य (प्रसाद) उपस्थित सभी जनों में वितरित कर, स्वयं सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करना चाहिए।





