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मंदिर ज्ञान📜 पूजा पद्धति1 मिनट पठन

मंदिर में चरणामृत पीने की सही विधि क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

दाहिने हाथ (कुप्पी मुद्रा), तुरंत पिएं, शेष शिर पर। बायां वर्जित। तुलसी+जल+चंदन+कपूर। शिर/बालों में फेरें। पंचामृत: दूध+दही+घी+शहद+शक्कर। तुलसी = antibacterial।

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विस्तृत उत्तर

चरणामृत = भगवान के चरण स्पर्श जल — अत्यंत पवित्र:

सही विधि

  1. 1दाहिने हाथ से ग्रहण (बायां = वर्जित)।
  2. 2हाथ = कुप्पी मुद्रा (अंगूठा+अंगुलियां = गड्ढा बनाएं)।
  3. 3खड़े होकर नहीं — बैठकर या झुककर (कुछ परंपरा)।
  4. 4तुरंत पिएं — नीचे न गिराएं।
  5. 5शेष = शिर पर लगाएं (आज्ञा चक्र/मस्तक)।
  6. 6हाथ बालों में फेरें = शुभ।

क्या है: तुलसी पत्ता + जल + चंदन + कपूर = चरणामृत। पंचामृत (दूध+दही+घी+शहद+शक्कर) भी।

लाभ: पाप नाश, शुद्धि, आयुर्वेदिक (तुलसी = antibacterial)।

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शास्त्रीय स्रोत
पूजा पद्धति
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