विस्तृत उत्तर
चरणामृत = भगवान के चरण स्पर्श जल — अत्यंत पवित्र:
सही विधि
- 1दाहिने हाथ से ग्रहण (बायां = वर्जित)।
- 2हाथ = कुप्पी मुद्रा (अंगूठा+अंगुलियां = गड्ढा बनाएं)।
- 3खड़े होकर नहीं — बैठकर या झुककर (कुछ परंपरा)।
- 4तुरंत पिएं — नीचे न गिराएं।
- 5शेष = शिर पर लगाएं (आज्ञा चक्र/मस्तक)।
- 6हाथ बालों में फेरें = शुभ।
क्या है: तुलसी पत्ता + जल + चंदन + कपूर = चरणामृत। पंचामृत (दूध+दही+घी+शहद+शक्कर) भी।
लाभ: पाप नाश, शुद्धि, आयुर्वेदिक (तुलसी = antibacterial)।





