विस्तृत उत्तर
दोबारा चढ़ाना = वर्जित (सामान्यतः):
नियम
- ▸एक बार भगवान को अर्पित = निर्माल्य (भगवान का) → वापस लेकर दोबारा अर्पित = 'दिया हुआ वापस' = अशुभ।
- ▸प्रसाद = ग्रहण करें, दोबारा न चढ़ाएं।
अपवाद
- ▸तुलसी: शालिग्राम → तुलसी = नित्य नई। किन्तु कुछ: 'पुरानी तुलसी ठीक' (विवाद)।
- ▸गंगाजल: अभिषेक जल → पुनः चरणामृत = मान्य (कुछ)।
- ▸एक मंदिर → दूसरा: मंदिर A प्रसाद → मंदिर B चढ़ाना = वर्जित।
सार: 'ताजा + नया + शुद्ध = भगवान को। पुराना/बासी/दोबारा = नहीं।' भक्ति = सर्वोत्तम अर्पण।





