विस्तृत उत्तर
पूजा में उपयोग किया गया जल (अभिषेक जल, आचमन जल, पाद्य-अर्घ्य) पवित्र माना जाता है और इसके विसर्जन के विशेष नियम हैं।
विभिन्न प्रकार के पूजा जल और उनका विसर्जन
- 1चरणामृत (भगवान के चरण का जल) — यह अत्यंत पवित्र है। इसे फेंकना नहीं चाहिए बल्कि प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
- 1अभिषेक जल (पंचामृत सहित) — शिवलिंग या मूर्ति पर चढ़ाया गया जल/पंचामृत — इसे तुलसी के पौधे या पीपल की जड़ में डालें।
- 1पूजा का शेष जल (अर्घ्य, पाद्य) — तुलसी के पौधे, किसी पवित्र वृक्ष की जड़ या बगीचे में डालें।
- 1कलश का जल — अनुष्ठान के बाद कलश का जल तुलसी, पीपल या बरगद की जड़ में या बहते जल (नदी) में प्रवाहित करें।
कहाँ न फेंकें
- ▸नाली/सीवर में नहीं — पवित्र जल गंदे नाले में डालना अनुचित है।
- ▸शौचालय में नहीं — सर्वथा वर्जित।
- ▸कूड़ेदान में नहीं — अनादरपूर्ण।
- ▸अपवित्र स्थान पर नहीं — गंदगी वाले स्थान पर न डालें।
सर्वोत्तम विकल्प (प्राथमिकता क्रम)
- 1तुलसी के पौधे में
- 2पीपल/बरगद की जड़ में
- 3बगीचे में किसी पौधे में
- 4बहते जल (नदी/नहर) में
- 5स्वच्छ भूमि पर (जहां पैर न पड़ें)
व्यावहारिक सुझाव (फ्लैट/अपार्टमेंट में)
- ▸बालकनी में गमले के पौधे में डालें।
- ▸यदि कोई पौधा नहीं है तो स्वच्छ भूमि (बालकनी) पर डालें।





