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पूजा विधि📜 धर्मसिंधु, पूजा पद्धति, लोक परंपरा2 मिनट पठन

पूजा में उपयोग किया गया जल कहाँ फेंकें

संक्षिप्त उत्तर

पूजा जल तुलसी के पौधे, पीपल/बरगद की जड़ या बगीचे में डालें। चरणामृत प्रसाद के रूप में ग्रहण करें, फेंकें नहीं। नाली, शौचालय या कूड़ेदान में कभी न डालें। फ्लैट में गमले के पौधे में डालना उत्तम विकल्प है।

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विस्तृत उत्तर

पूजा में उपयोग किया गया जल (अभिषेक जल, आचमन जल, पाद्य-अर्घ्य) पवित्र माना जाता है और इसके विसर्जन के विशेष नियम हैं।

विभिन्न प्रकार के पूजा जल और उनका विसर्जन

  1. 1चरणामृत (भगवान के चरण का जल) — यह अत्यंत पवित्र है। इसे फेंकना नहीं चाहिए बल्कि प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
  1. 1अभिषेक जल (पंचामृत सहित) — शिवलिंग या मूर्ति पर चढ़ाया गया जल/पंचामृत — इसे तुलसी के पौधे या पीपल की जड़ में डालें।
  1. 1पूजा का शेष जल (अर्घ्य, पाद्य) — तुलसी के पौधे, किसी पवित्र वृक्ष की जड़ या बगीचे में डालें।
  1. 1कलश का जल — अनुष्ठान के बाद कलश का जल तुलसी, पीपल या बरगद की जड़ में या बहते जल (नदी) में प्रवाहित करें।

कहाँ न फेंकें

  • नाली/सीवर में नहीं — पवित्र जल गंदे नाले में डालना अनुचित है।
  • शौचालय में नहीं — सर्वथा वर्जित।
  • कूड़ेदान में नहीं — अनादरपूर्ण।
  • अपवित्र स्थान पर नहीं — गंदगी वाले स्थान पर न डालें।

सर्वोत्तम विकल्प (प्राथमिकता क्रम)

  1. 1तुलसी के पौधे में
  2. 2पीपल/बरगद की जड़ में
  3. 3बगीचे में किसी पौधे में
  4. 4बहते जल (नदी/नहर) में
  5. 5स्वच्छ भूमि पर (जहां पैर न पड़ें)

व्यावहारिक सुझाव (फ्लैट/अपार्टमेंट में)

  • बालकनी में गमले के पौधे में डालें।
  • यदि कोई पौधा नहीं है तो स्वच्छ भूमि (बालकनी) पर डालें।
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शास्त्रीय स्रोत
धर्मसिंधु, पूजा पद्धति, लोक परंपरा
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