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चरणामृत से जुड़े सभी प्रश्न(9)

चरणामृत पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 9 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शिव पूजा नियम

शिवलिंग से बहकर आया जल पीना चाहिए या नहीं?

शिवलिंग का अभिषेक जल (निर्माल्य) ग्रहण करना शिव पुराण/लिंग पुराण में वर्जित है। कारण: शिव-शक्ति की तीव्र ऊर्जा, सोमसूत्र की पवित्रता। अन्य देवताओं का चढ़ावा ग्रहण होता है, शिवलिंग का नहीं — यह विशिष्ट नियम है। शिव मूर्ति का चरणामृत स्वीकार्य (भिन्न नियम)। अभिषेक जल पौधों में डालें।

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दान और फलश्रुति

रुद्राभिषेक का चरणामृत पीने से क्या होता है?

रुद्राभिषेक का चरणामृत = 'तीर्थोदक' — शिव के स्पंदनों से युक्त, दिव्य और सर्व-रोगनाशक। पान करें और घर के सभी कोनों पर छिड़कें। फल: घर की नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष नष्ट होते हैं।

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व्रत के नियम और वर्जित वस्तुएं

शिवलिंग पर नारियल पानी क्यों नहीं चढ़ाना चाहिए?

साबुत नारियल शिव को अर्पित होता है, परंतु नारियल पानी से अभिषेक निषिद्ध है। कारण: शिव को अर्पित जल = 'चरणामृत' (ग्रहण योग्य), परंतु देवताओं को अर्पित नारियल का जल शास्त्रों में ग्रहण करने योग्य नहीं माना गया।

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पूजा एवं अनुष्ठान

चरणामृत कैसे बनाएं कितना पिएं

तांबे के पात्र में जल, गंगाजल, तुलसी, चंदन और अक्षत मिलाकर भगवान के चरण धोएं — यह चरणामृत है। दाएं हाथ में तीन बार लेकर, पहले सिर से लगाकर फिर पिएं।

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दैनिक आचार

चरणामृत रोज पीने के क्या लाभ हैं

चरणामृत: पाप नाश, ईश्वर कृपा। वैज्ञानिक: तांबे का जीवाणुरोधी जल, तुलसी इम्यूनिटी बूस्टर, पंचामृत पोषक। दाहिने हाथ से, पूजा बाद प्रतिदिन लें।

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पूजा विधि

पूजा में उपयोग किया गया जल कहाँ फेंकें

पूजा जल तुलसी के पौधे, पीपल/बरगद की जड़ या बगीचे में डालें। चरणामृत प्रसाद के रूप में ग्रहण करें, फेंकें नहीं। नाली, शौचालय या कूड़ेदान में कभी न डालें। फ्लैट में गमले के पौधे में डालना उत्तम विकल्प है।

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शिव पूजा

शिवलिंग पर अभिषेक के बाद बचा जल किसे दे सकते हैं?

अभिषेक जल: अत्यंत पवित्र (शिव चरणामृत)। स्वयं पिएँ, परिवार-भक्तों को दें, तुलसी में डालें, घर में छिड़कें। वर्जित: नाली/अपवित्र स्थान, पैर से स्पर्श, जलहरी लाँघना। भस्म/धतूरा मिश्रित जल न पिएँ — पौधों में डालें।

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मंदिर नियम

मंदिर में चढ़ाए गए प्रसाद को घर ला सकते हैं या नहीं?

प्रसाद घर लाना अत्यन्त शुभ — परिवार में बाँटना विशेष पुण्य। नियम: दाहिने हाथ से ग्रहण, जूठा न छोड़ें, भूमि पर न गिराएँ। सूखा प्रसाद रख सकते हैं, चरणामृत तत्काल ग्रहण करें। खराब होने पर जल/वृक्ष में विसर्जित करें, कूड़ेदान में नहीं। प्रसाद बेचना वर्जित।

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मंदिर ज्ञान

मंदिर में चरणामृत पीने की सही विधि क्या है?

दाहिने हाथ (कुप्पी मुद्रा), तुरंत पिएं, शेष शिर पर। बायां वर्जित। तुलसी+जल+चंदन+कपूर। शिर/बालों में फेरें। पंचामृत: दूध+दही+घी+शहद+शक्कर। तुलसी = antibacterial।

#चरणामृत#पीने#विधि
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