विस्तृत उत्तर
रसशास्त्र के ग्रंथों में पारद के कुल 'अष्टादश' संस्कारों का विधान है।
परन्तु, 'रसरत्नसमुच्चय' यह भी स्पष्ट करता है कि इनमें से प्रथम 'अष्ट-संस्कार' (आठ प्रक्रियाएं) ही 'देहसिद्धि' (कायाकल्प या औषधीय प्रयोग) के लिए मुख्य हैं। शिवलिंग निर्माण, जिसे 'रससिद्धि' का ही एक भाग माना जाता है, के लिए भी इन्हीं आठ संस्कारों को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना गया है।





