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तंत्र में पारद गुटिका कैसे बनती है?

पारद गुटिका: शुद्ध पारद को अष्टसंस्कार (8 शुद्धिकरण) → रजत/स्वर्ण ग्रास → वनौषधियों से खरल → गोली रूप में बंधन → मंत्र सिद्धि।

संक्षिप्त उत्तर

पारद गुटिका: शुद्ध पारद को अष्टसंस्कार (8 शुद्धिकरण) → रजत/स्वर्ण ग्रास → वनौषधियों से खरल → गोली रूप में बंधन → मंत्र सिद्धि। लाभ: बाधा-निवारण, ग्रह शांति, ऊर्जा वृद्धि। सावधानी: बाजारी गुटिका प्रायः अशुद्ध — केवल प्रमाणित स्रोत से प्राप्त करें।

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विस्तृत उत्तर

पारद गुटिका तंत्र और रस शास्त्र दोनों में अत्यन्त पूजनीय और शक्तिशाली वस्तु मानी जाती है। पारद (Mercury) को भगवान शिव का वीर्य माना गया है और इसकी गुटिका बनाना अत्यन्त दुर्लभ कार्य है।

पारद गुटिका क्या है

शुद्ध पारद (Mercury) को विशिष्ट संस्कारों और औषधियों के योग से ठोस रूप (गोली/मणि) में बाँधना = पारद गुटिका। इसे 'रसमणि' भी कहते हैं।

निर्माण प्रक्रिया (शास्त्रोक्त)

चरण 1 — अष्टसंस्कार (आठ शुद्धिकरण)

रस शास्त्र के अनुसार पारद के आठ संस्कार अनिवार्य हैं:

  1. 1स्वेदन — पारद को विभिन्न द्रव्यों के साथ भाप देना
  2. 2मर्दन — औषधियों के साथ खरल में पीसना
  3. 3मूर्च्छन — पारद को मूर्छित (स्तब्ध) करना
  4. 4उत्थापन — पारद को पुनः जागृत करना
  5. 5पातन — ऊर्ध्वपातन/अधःपातन द्वारा शोधन
  6. 6रोधन — पारद को बाँधना (स्थिर करना)
  7. 7नियामन — गुणों का नियंत्रण
  8. 8दीपन — पारद की शक्ति जागृत करना

चरण 2 — ग्रास (धातु मिश्रण)

अष्टसंस्कारित पारद में रजत (चाँदी) का ग्रास दिया जाता है। उच्च कोटि की गुटिका में हीरक भस्म, स्वर्ण भस्म, और रजत भस्म — तीनों निश्चित अनुपात में मिलाई जाती हैं। इसे शिवलिंगी और पान के रस से खरल किया जाता है।

चरण 3 — बंधन (ठोस रूप)

विशिष्ट वनौषधियों (काले धतूरे का तेल आदि) के साथ खरल करके पारद को गाढ़ा बनाया जाता है जब तक कि वह गोली (गुटिका) के रूप में बँध न जाए। फिर सेंधा नमक और गरम पानी से शुद्ध किया जाता है। शिवलिंगी के रस में 3 दिन रखकर कठोर किया जाता है।

चरण 4 — मंत्र सिद्धि

गुटिका निर्माण के दौरान और बाद में रसायन सिद्धि मंत्र का जप अनिवार्य है।

पारद गुटिका के लाभ (शास्त्रोक्त)

  • ▸नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से रक्षा
  • ▸ग्रह दोष शान्ति
  • ▸शारीरिक ऊर्जा वृद्धि
  • ▸साधना में एकाग्रता
  • ▸चरक संहिता में पारद को 'देवताओं का अमृत' कहा गया

सावधानी

  • ▸बाजार में अधिकांश पारद गुटिकाएँ अशुद्ध होती हैं (हथेली पर रगड़ने पर काली पड़ जाएँ = अशुद्ध)
  • ▸पारद विषैला धातु है — अशुद्ध पारद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
  • ▸केवल प्रमाणित रस वैद्य या सिद्ध साधक से ही गुटिका प्राप्त करें
  • ▸सेवन (मुख में धारण) केवल शुद्ध अष्टसंस्कारित पारद गुटिका का ही करें

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पारद गुटिका क्या है

शुद्ध पारद (Mercury) को विशिष्ट संस्कारों और औषधियों के योग से ठोस रूप (गोली/मणि) में बाँधना = पारद गुटिका। इसे 'रसमणि' भी कहते हैं।

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