विस्तृत उत्तर
पारद शिवलिंग पारे (Mercury) और चाँदी के मिश्रण से बनता है। शिव पुराण और लिंग पुराण में पारद शिवलिंग का उल्लेख मिलता है। इसकी पूजा अत्यंत शुभ और फलदायी मानी जाती है, परंतु इसके नियम बहुत कड़े हैं।
पारद शिवलिंग रखने के नियम
- 1सफेद कपड़े पर स्थापना — पारद शिवलिंग को सदैव शुद्ध सफेद कपड़े पर स्थापित करें।
- 2नियमित पूजा अनिवार्य — पारद शिवलिंग की नियमित (प्रतिदिन) सुबह-शाम पूजा करना अनिवार्य है। अनियमित पूजा हानिकारक हो सकती है।
- 3स्वर्ण से दूर रखें — पारद शिवलिंग के स्पर्श में सोने का कोई आभूषण नहीं आना चाहिए — पारद सोने को नष्ट कर सकता है।
- 4रुद्राक्ष साथ रखें — पारद शिवलिंग के साथ रुद्राक्ष रखना अनिवार्य माना जाता है।
- 5मांस-मदिरा वर्जित — जिस घर में पारद शिवलिंग हो, वहाँ मांस-मदिरा का सेवन नहीं होना चाहिए।
- 6अभिषेक अनिवार्य — नियमित जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक करें।
- 7स्वच्छता — पूजा करने वाला स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहने।
- 8दिशा — शिवलिंग की जलधारी उत्तर दिशा की ओर रखें, भक्त पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठे।
- 9आकार — घर के लिए छोटा (अंगूठे के आकार का) पारद शिवलिंग उत्तम है।
- 10प्रसाद — शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूरा चढ़ाएँ (शिव प्रिय हैं)। तुलसी, हल्दी और सिंदूर वर्जित है।
लाभ
- ▸भगवान शिव और माँ लक्ष्मी दोनों की कृपा।
- ▸ग्रह दोष शांति, सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य लाभ।
- ▸घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति।
सावधानी: असली पारद शिवलिंग अष्ट संस्कार विधि से बनता है, जिसमें 6-12 माह लगते हैं। बाज़ार में नकली पारद शिवलिंग भी उपलब्ध हैं — किसी विश्वसनीय स्रोत से ही खरीदें।





