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क्या यमदूत जीव को बांधते हैं?

हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार यमदूत पापी जीव के गले में पाश (रस्सी) बाँधते हैं। यह पाश पापकर्मों का प्रतीक है।

संक्षिप्त उत्तर

हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार यमदूत पापी जीव के गले में पाश (रस्सी) बाँधते हैं। यह पाश पापकर्मों का प्रतीक है। इसी बंधन के कारण जीवात्मा अपने शरीर में वापस नहीं लौट सकती। पुण्यात्मा के लिए कोई बंधन नहीं होता।

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विस्तृत उत्तर

हाँ, गरुड़ पुराण में स्पष्ट वर्णन है कि यमदूत पापी जीव को पाश (रस्सी या फंदा) से बाँधते हैं। यह बंधन पापकर्मों का प्रतीक है — जैसे व्यक्ति ने अपने जीवन में स्वयं को पाप की रस्सी से बाँधा, वैसे ही मृत्यु के बाद उसे वास्तविक पाश में जकड़ा जाता है।

गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प में कहा गया है — 'गले में बलपूर्वक पाशों से बाँधकर सुदूर यममार्ग यातना के लिए उसी प्रकार ले जाया जाता है जिस प्रकार राजपुरुष दंडनीय अपराधी को ले जाते हैं।' यह पाश यमदूत के हाथों का प्रमुख अस्त्र है जिसका उल्लेख प्रारंभ से ही किया गया है।

इस बंधन का एक और अर्थ है — जीव अपनी इच्छा से शरीर नहीं छोड़ना चाहता था, मोह में था। यमदूत के पाश में बँध जाने के बाद वह अपने शरीर में लौट भी नहीं सकता। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जीवात्मा घर आकर अपने शरीर में प्रवेश करने की इच्छा रखती है, 'किंतु यमदूतों के पाश में बँधे होने से वह मुक्त नहीं हो पाती।'

पुण्यात्माओं के लिए कोई बंधन नहीं होता — वे स्वतंत्र रूप से दिव्य गति को प्राप्त होती हैं।

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