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पाश प्रश्नोत्तरी — 16 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पाश विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 16 प्रश्न

दिव्यास्त्र

नागपाश क्या है

नागपाश एक दिव्य बाण है जो छोड़ने पर असंख्य विषैले नागों में बदल जाता है और लक्ष्य को मृत्यु तक नहीं छोड़ता। इसे भगवान ब्रह्मा ने बनाया था। यमपाश से भी अधिक भयंकर अस्त्र।

नागपाशविषैले नागपाश
दिव्यास्त्र

यमराज के पास कालदण्ड के अलावा और कौन से अस्त्र हैं?

यमराज के पास कालदण्ड के अलावा एक गदा और एक पाश भी है। पाश से वे आत्मा को खींचते हैं लेकिन कालदण्ड उनकी सर्वोच्च शक्ति का प्रतीक है।

यमराजकालदण्डगदा
पाशुपत तत्त्व

पशु और पाश का अर्थ किस विषय में बताया गया है?

पशु को जीव और पाश को बन्धन मानकर उनकी मीमांसा का विषय बताया गया है।

पशुजीवपाश
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

आत्मा को गले में पाश से बाँधकर क्यों ले जाया जाता है?

गले में पाश से बाँधना यमदूतों द्वारा आत्मा को यममार्ग पर ले जाने का वर्णन है।

पाशयमदूतगला
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

तेरहवें दिन यमदूत आत्मा को कैसे ले जाते हैं?

तेरहवें दिन यमदूत आत्मा को गले में पाश से बाँधकर यममार्ग की ओर खींचते हैं।

तेरहवाँ दिनयमदूतपाश
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूत आत्मा को किससे बाँधते हैं?

यमदूत आत्मा को पाश यानी रस्सी से बाँधते हैं।

यमदूतपाशआत्मा
तांत्रिक विश्व दृष्टि और तीन भाव

पशु भाव क्या होता है?

पशु-भाव वह अवस्था है जिसमें व्यक्ति सामाजिक नियमों, भय, लज्जा और घृणा के बंधनों (पाश) में जकड़ा रहता है — वह शुद्ध-अशुद्ध के भेद को मानता है और साधना इन्हीं सीमाओं में रहती है।

पशु भावसामाजिक बंधनपाश
शिव-नाग संयुक्त सिद्धांत

शिव को पशुपति क्यों कहते हैं?

शिव को पशुपति इसलिए कहते हैं क्योंकि वे समस्त जीवों (पशुओं) के स्वामी हैं — जो नाग-पाश जीव को बाँधता है, वही नाग शिव के आभूषण हैं, अर्थात वह बंधन शिव के नियंत्रण में है।

पशुपतिशिवपाश
पाशुपत अस्त्र साधना

पाशुपत दर्शन में 'पाश' का क्या तात्पर्य है?

माया, मोह, अज्ञान और कर्म के वे बंधन जो जीव को बांधकर रखते हैं, 'पाश' कहलाते हैं।

पाशबंधनमाया
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को कैसे बांधा जाता है?

गरुड़ पुराण में नरक में जीव को पाश (रस्सी), जंजीर (गले-हाथ-पैर), अंकुश और पीठ पर लोहे के भार से बाँधा जाता है। यह उसी बंधन का प्रतीक है जिसमें वह जीवन भर पापकर्मों से जकड़ा रहा।

नरकबंधनजंजीर
जीवन एवं मृत्यु

यमदूत जीव को किस प्रकार खींचते हैं?

गरुड़ पुराण के अनुसार यमदूत जीव के गले में पाश बाँधकर, राजपुरुष की तरह बलपूर्वक घसीटते हुए यममार्ग पर ले जाते हैं। थकने पर पीठ पर कोड़े मारते हैं, गिरने पर भी आगे धकेलते हैं। कोई दया नहीं होती।

यमदूतखींचनापाश
जीवन एवं मृत्यु

यमदूतों के हाथ में पाश का क्या महत्व है?

यमदूतों का पाश पापकर्मों का बंधन है, कर्म-न्याय की अनिवार्यता का प्रतीक है और मोह-आसक्ति का स्थूल रूप है। यह बताता है कि कोई भी अपने कर्मफल से नहीं बच सकता। पाश में बँधा जीव शरीर और परिजनों के पास नहीं लौट सकता।

पाशयमदूतबंधन
जीवन एवं मृत्यु

क्या यमदूत जीव को बांधते हैं?

हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार यमदूत पापी जीव के गले में पाश (रस्सी) बाँधते हैं। यह पाश पापकर्मों का प्रतीक है। इसी बंधन के कारण जीवात्मा अपने शरीर में वापस नहीं लौट सकती। पुण्यात्मा के लिए कोई बंधन नहीं होता।

यमदूतपाशबंधन
जीवन एवं मृत्यु

यमदूत जीव को कैसे पकड़ते हैं?

गरुड़ पुराण के अनुसार यमदूत पापी जीव को बलपूर्वक पकड़ते हैं — जैसे राजपुरुष अपराधी को। उसे यातना-देह से ढककर गले में पाश बाँध देते हैं। पुण्यात्मा के लिए देवदूत दिव्य विमान से सम्मानपूर्वक ले जाते हैं।

यमदूतजीवपाश
जीवन एवं मृत्यु

यमदूत किस प्रकार के अस्त्र धारण करते हैं?

यमदूत मुख्यतः पाश (फंदा) और दंड (डंडा) धारण करते हैं। पाश से जीवात्मा को बाँधते हैं, दंड से आगे ले जाते हैं। उनके नाखून भी आयुध जैसे तीखे बताए गए हैं। नरक में मुगदर और कोड़ों का भी वर्णन है।

यमदूतअस्त्रपाश
देवी-देवता परिचय

वरुण देव कौन हैं और क्या करते हैं?

वरुण देव जल, समुद्र और नदियों के अधिपति हैं। वे पश्चिम दिशा के दिक्पाल, सत्य के रक्षक और न्याय के देवता हैं। उनका वाहन मगरमच्छ और अस्त्र पाश है।

वरुण देवजल देवतापाश

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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