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विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर धारण करती है। यमदूत उस अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर को पाश, अर्थात रस्सी, से बाँध लेते हैं। तेरहवें दिन सपिण्डीकरण के पश्चात यमराज के अनुचर उस प्रेत को गले में पाश से बाँधकर ले जाते हैं। गरुड़ पुराण में इसे इस प्रकार बताया गया है कि वह प्रेत पाशबद्ध होकर उसी तरह खींचा जाता है जैसे पकड़े हुए बंदर को खींचा जाता है।
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