विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प में यमदूतों द्वारा जीव को खींचने की प्रक्रिया का विशद वर्णन किया गया है।
मृत्यु के समय जब जीव शरीर से निकलता है — अंगूठे के बराबर अंगुष्ठमात्र प्रमाण में — तो यमदूत उसे तुरंत पकड़ लेते हैं। यह अत्यंत सूक्ष्म जीवात्मा को बलपूर्वक पकड़ना उनके लिए स्वाभाविक है।
इसके बाद वे जीवात्मा के गले में पाश बाँधते हैं और उसे घसीटते हुए यममार्ग पर ले जाते हैं। गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'जिस प्रकार राजपुरुष दंडनीय अपराधी को ले जाते हैं।' यह उपमा यमदूतों की उस कार्यप्रणाली को स्पष्ट करती है।
यममार्ग पर जब जीव थककर गिरता है, तो यमदूत उसकी पीठ पर कोड़े मारते हुए उसे आगे धकेलते हैं। 'चलने में असमर्थ जगह पर भी उसे चलाया जाता है।' उनमें कोई करुणा नहीं — वे न्याय के दूत हैं, दया के नहीं।
गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय में यह भी कहा गया है कि कुछ पापी जीवों को 'अंकुश में फँसाकर खींचा जाता है।' यह कर्म की गंभीरता के अनुसार दंड का प्रकार बदलता है।
यह सब पाप की उस अनिवार्यता का चित्रण है जिससे बचना असंभव है।





